रुद्रप्रयाग

केदारनाथः एक हफ्ते में 1000 किलो प्लास्टिक वेस्ट एकत्र

नगर पंचायत ने कॉम्पेक्टर मशीन से किया निस्तारण, जुटाएगी राजस्व

केदारनाथ। केदारनाथ धाम में नगर पंचायत ने पर्यावरण संरक्षण की दिशा में बड़ी उपलब्धि हासिल की है। कपाट खुलने के शुरुआती सात दिनों में ही निकाय ने धाम से लगभग एक हजार किलो प्लास्टिक कचरा एकत्रित कर उसे कॉम्पेक्ट किया है। पंचायत अब गीले कचरे के निस्तारण के लिए पक्के पिट्स बनाने पर भी काम कर रही है।

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा कि उत्तराखंड अपनी आस्था के साथ-साथ अपने नाजुक पारिस्थितिकी तंत्र के लिए भी जाना जाता है। उन्होंने देश-दुनिया से आने वाले तीर्थयात्रियों से अपील की है कि वे हिमालयी क्षेत्रों में प्लास्टिक या अन्य कचरा इधर-उधर न फेंकें।
मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया कि राज्य सरकार पवित्र नदियों और पर्वतराज हिमालय की शुद्धता बनाए रखने के लिए प्रतिबद्ध है। नगर पालिकाओं व ग्राम पंचायतों के माध्यम से यात्रा मार्ग पर सघन सफाई अभियान चलाया जा रहा है।

कचरे से कमाई की पहल
22 अप्रैल को कपाट खुलने के बाद से ही केदारनाथ में रिकॉर्ड संख्या में यात्री पहुंच रहे हैं। जिससे पानी की बोतलों के रूप में भारी मात्रा में प्लास्टिक वेस्ट जमा हो रहा है। इस चुनौती से निपटने के लिए नगर पंचायत ने धाम में 3 हजार वर्ग फीट क्षेत्र में एक ’मटीरियल रिकवरी फैसीलिटी’ (MRF) स्थापित की है। यहां एकत्रित कचरे को 15 अलग-अलग श्रेणियों में बांटा जाता है, जिसमें प्लास्टिक, कांच, टिन और कपड़े शामिल हैं। कॉम्पेक्टर मशीन प्लास्टिक बोतलों को पिचकाकर 30 से 40 किलो की गठरी में तब्दील कर देती है।

प्रधानमंत्री की अपील का असर
धाम में स्वच्छता व्यवस्था को चाक-चौबंद रखने के लिए 55 सफाई कर्मचारी दो पालियों (सुबह और शाम) में निरंतर कार्य कर रहे हैं। गौरतलब है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी हाल ही में देहरादून दौरे के दौरान तीर्थयात्रियों से ’सिंगल यूज प्लास्टिक’ का उपयोग न करने और पर्यावरण को स्वच्छ रखने की अपील की थी। प्रधानमंत्री की इसी मंशा के अनुरूप केदारनाथ धाम में आधुनिक तकनीकों और बेहतर प्रबंधन के जरिए हिमालय की गोद में स्वच्छता का नया अध्याय लिखा जा रहा है।

यह बोले अधिशासी अधिकारी
नगर पंचायत अधिशासी अधिकारी नीरज कुकरेती ने बताया कि एकत्रित प्लास्टिक को बेचकर नगर पंचायत राजस्व भी अर्जित करेगी। कांच और टिन जैसे अन्य कचरे को सोनप्रयाग लाकर कबाड़ के रूप में बेचा जाएगा।

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