ऋषिकेश शहर को मिलेगी ‘कूड़े के पहाड़’ से निजात
लालपानी बीट में नवनिर्मित वेस्ट मैनेजमेंट प्लांट का हुआ ट्रायल

ऋषिकेश। गुमानीवाला अंतर्गत लालपानी बीट में नए वेस्ट मैनेजमेंट प्लांट के ट्रायल के साथ ही नगर निगम ने गोविंदनगर स्थित पुराने डंपिंग ग्राउंड को पूरी तरह समाप्त करने की योजना पर काम तेज कर दिया है। नए प्लांट के नियमित संचालन से न केवल शहर का दैनिक कचरा प्रोसेस होगा, बल्कि दशकों से जमा ’लिगेसी वेस्ट’ (पुराना कचरा) भी अब इतिहास बन जाएगा।
जीरो वेस्ट सिटी की ओर बढ़ते कदम
मेयर शंभू पासवान ने निरीक्षण के दौरान स्पष्ट किया कि लालपानी प्लांट की क्षमता न केवल वर्तमान आबादी, बल्कि भविष्य की जरूरतों और चारधाम यात्रा के दौरान बढ़ने वाले कचरे के दबाव को झेलने के लिए पर्याप्त है। “हमारा लक्ष्य ऋषिकेश को ’जीरो वेस्ट सिटी’ बनाना है। नए प्लांट में आरडीएफ (त्मनिम क्मतपअमक थ्नमस) के उत्पादन से सीमेंट फैक्ट्रियों को ईंधन मिलेगा, जिससे कचरे का शत-प्रतिशत पुनर्चक्रण सुनिश्चित होगा।
बायो-माइनिंग तकनीक का होगा उपयोग
नगर निगम सूत्रों के अनुसार, गोविंदनगर में जमा कई टन कचरे को बायो-माइनिंग तकनीक के जरिए निस्तारित किया जाएगा। कचरे को मशीनों के जरिए अलग-अलग श्रेणियों (मिट्टी, प्लास्टिक, पत्थर और धातु) में बांटा जाएगा। कचरा हटने के बाद खाली होने वाली बेशकीमती भूमि का उपयोग जनहित के कार्यों या हरित क्षेत्र विकसित करने में किया जा सकेगा।
प्लांट पर एक नजर
प्लांट की अवधि 15 वर्षों के लिए निजी कंपनी (पीपीपी मोड) द्वारा संचालित होगा। गीले कचरे से कंपोस्ट खाद और सूखे कचरे से आरडीएफ ( रेफ्यूज डेराइव्ड फ्यूल) तैयार किया जाएगा। गंगा के तटीय क्षेत्र में भूजल प्रदूषण और दुर्गंध में कमी आएगी। इस महीने के आखिरी तक प्लांट का पूरा संचालन शुरू होने की संभावना।
नगर आयुक्त की अपील
नगर आयुक्त गोपाल राम बिनवाल ने अपील की है कि प्लांट की सफलता के लिए क्षेत्रवासी घरों से ही कूड़े का पृथक्करण करें। गीला और सूखा कूड़ा अलग-अलग होने से प्लांट की मशीनों की कार्यक्षमता और बेहतर रहेगी।



