
ऋषिकेश। अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) रायपुर और सत्य साईं स्वास्थ्य एवं शिक्षा ट्रस्ट के बीच दूसरा एमओयू हुआ। दोनों ही संस्थानों ने बाल हृदय रोग और जनस्वास्थ्य अनुसंधान को नई ऊंचाइयों पर ले जाने को लेकर प्रतिबद्धता जाहिर की।
सत्य साई संजीवनी हॉस्पिटल रायवाला के पीआरओ चित्रवीर क्षेत्री ने यह जानकारी दी। बताया कि एम्स रायपुर के कार्यकारी निदेशक लेफ्टिनेंट जनरल अशोक जिंदल और ट्रस्ट चेयरमैन सी. श्रीनिवास ने समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर किए। उन्होंने जोर दिया कि ’विकसित भारत’ के संकल्प को पूरा करने के लिए एक मजबूत और सुलभ स्वास्थ्य प्रणाली अनिवार्य है।
लेफ्टिनेंट जनरल जिंदल ने इस पहल को सही दिशा में उठाया गया कदम बताते हुए कहा कि इससे रोगों की सटीक पहचान और उपचार में क्रांतिकारी बदलाव आएंगे।
बायो-बैंक और होमोग्राफ्ट सुविधाओं का मिलेगा लाभ
इस साझेदारी का सबसे महत्वपूर्ण स्तंभ सत्य साईं संजीवनी रिसर्च फाउंडेशन द्वारा स्थापित बायो-बैंक और होमोग्राफ्ट वाल्व बैंक है। मध्य भारत के इस पहले वाल्व बैंक में अब तक 80,000 से अधिक सैंपल्स संग्रहित किए जा चुके हैं। डॉ. अभिरुचि गल्होत्रा ने बताया कि इन नमूनों का उपयोग जटिल हृदय रोगों के अध्ययन और साक्ष्य-आधारित शोध के लिए किया जाएगा।
मरीजों को मिला ’जीवन का उपहार’
कार्यक्रम के दौरान ट्रस्ट के “गिफ्ट ऑफ लाइफ” अभियान के तहत कई सफल उपचारित मरीजों को उनके अभिभावकों की उपस्थिति में ’जीवन प्रमाण पत्र’ भी प्रदान किए गए। विशेषज्ञों का मानना है कि दोनों संस्थानों की यह संयुक्त शक्ति भविष्य में निवारक स्वास्थ्य सेवा के क्षेत्र में मील का पत्थर साबित होगी।



