Dehradun: सास-बहू की जोड़ी ने राखी कारोबार से मचाई धूम

देहरादून 22 अगस्त। रक्षाबंधन के लिए देहरादून में ग्रामीण महिलाओं की हैंडमेड राखियों की मांग तेजी से बढ़ रही है। राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन के सहयोग से रायपुर, सहसपुर और डोईवाला विकासखंड की महिलाएं राखी निर्माण से न केवल अपनी आमदनी बढ़ा रही हैं, बल्कि आत्मनिर्भरता की दिशा में भी मजबूत कदम बढ़ा रही हैं।
रायपुर विकासखंड के मालदेवता क्षेत्र की सास-बहू लीला रावत और अलका रावत की जोड़ी राखी कारोबार में अपनी अलग पहचान बना रही है। रायपुर ब्लॉक की नई दिशा महिला क्लस्टर लेवल फेडरेशन (सीएलएफ) के अंतर्गत आशा किरण स्वयं सहायता समूह से जुड़ी दोनों महिलाएं मिलकर आकर्षक डिजाइन की राखियां तैयार कर रही हैं। इस वर्ष उन्होंने दो हजार से अधिक राखियां तैयार करने का लक्ष्य रखा है, जिसमें से अब तक करीब 1,500 राखियां तैयार की जा चुकी हैं।
पिछले साल कमाया 25 हजार का मुनाफा
लीला और अलका ने बताया कि पिछले वर्ष प्रशासन के सहयोग से उन्हें बेहतर बाजार उपलब्ध हुआ। दोनों ने करीब 1,200 राखियां तैयार कर सीधे बाजार में बिक्री की, जिससे उन्हें लगभग 25 हजार रुपये का मुनाफा हुआ। इस वर्ष उन्होंने राखी कारोबार को और विस्तार देने का लक्ष्य तय किया है।
नौकरी छोड़ सास के साथ शुरू किया स्वरोजगार
अलका रावत ने पिछले वर्ष प्राइवेट नौकरी छोड़कर अपनी सास लीला के साथ स्वरोजगार की राह चुनी। दोनों ने मालदेवता क्षेत्र में ‘विनी वंडर्स क्रिएशन नाम से दुकान शुरू की है। एनआरएलएम के सहयोग से शुरू किए गए इस स्वरोजगार से वे राखियों के साथ अन्य हस्तनिर्मित व स्थानीय उत्पादों का भी कारोबार कर रही हैं।
ऑनलाइन प्लेटफॉर्म से भी मिल रहे ऑर्डर
हैंडमेड राखियों की बिक्री अब स्थानीय बाजार तक सीमित नहीं है। ‘विनी वंडर्स क्रिएशन के इंस्टाग्राम प्लेटफॉर्म के माध्यम से भी ग्राहकों से राखियों के ऑर्डर मिल रहे हैं। महिलाएं ऑनलाइन माध्यम से प्राप्त ऑर्डर तैयार कर ग्राहकों तक पहुंचा रही हैं। इससे उनके कारोबार को स्थानीय बाजार के साथ-साथ डिजिटल बाजार में भी विस्तार मिल रहा है।
पारंपरिक से आधुनिक डिजाइनों तक तैयार हो रहीं राखियां
समूह की महिलाओं द्वारा ऊन, क्रोशिया, मौली के धागे, रिबन सहित विभिन्न सामग्रियों से आकर्षक राखियां तैयार की जा रही हैं। इनमें भैया दूज, महाकाल, रुद्राक्ष, नजरबट्टू समेत कई पारंपरिक और आधुनिक डिजाइन शामिल हैं। राखियों की डिजाइनिंग, प्रिंटिंग, पैकेजिंग और प्रचार-प्रसार का काम भी महिलाएं स्वयं कर रही हैं।
वर्ष 2016 से एनआरएलएम से जुड़कर बढ़ा रहीं कारोबार
आशा किरण स्वयं सहायता समूह की अध्यक्ष लीला रावत ने बताया कि वह वर्ष 2016 से राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन से जुड़ी हैं। इस दौरान उन्हें विभिन्न जनकल्याणकारी योजनाओं का लाभ मिला, जिससे स्वरोजगार को आगे बढ़ाने में मदद मिली।
सहसपुर और डोईवाला की तैयार हो रही राखियां
सहसपुर और डोईवाला विकासखंड की स्वयं सहायता समूहों की महिलाएं भी बड़े स्तर पर राखियां तैयार कर रही हैं। डोईवाला की गायत्री क्लस्टर लेवल फेडरेशन के अंतर्गत वैभव लक्ष्मी और पहाड़ी भुली ग्राम संगठनों से जुड़ी करीब 100 महिलाएं विभिन्न डिजाइन की राखियां बना रही हैं। इन राखियों की बिक्री रायवाला और श्यामपुर के विभिन्न बाजारों में स्टॉल लगाकर की जा रही है। वहीं, सहसपुर के सक्षम क्लस्टर की महिलाएं की राखियों को ब्लॉक स्तर पर प्रदर्शित किया जा रहा है। जिन्हें सेलाकुई, सहसपुर और विकासनगर क्षेत्र में अच्छा बाजार मिल रहा है।
दून के प्रमुख मॉलों में लगेंगे स्टॉल
मुख्य विकास अधिकारी अभिनव शाह ने बताया कि रक्षाबंधन के लिए समूह की महिलाएं आकर्षक राखियां तैयार कर रही हैं। जिला प्रशासन द्वारा देहरादून के तीन-चार प्रमुख मॉलों में भी राखियों के स्टॉल लगाए जाएंगे। उन्होंने आमजन से महिलाओं द्वारा तैयार हस्तनिर्मित राखियों की खरीदारी कर उनके स्वरोजगार को प्रोत्साहित करने की अपील की है।
सचिवालय में भी लगेंगे पांच स्टॉल
सहायक परियोजना निदेशक अनीता पंवार ने बताया कि इस वर्ष भी मुख्यमंत्री सशक्त बहना योजना के तहत 24 से 27 अगस्त तक उत्तराखंड सचिवालय में पांच स्टॉल लगाए जाएंगे। जिनमें समूहों की महिलाएं राखियों के साथ पहाड़ी और स्थानीय उत्पादों की प्रदर्शनी लगाएंगी।



