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उत्तराखंडः स्कूलों के लिए बनेगा आपदा प्रबंधन प्लान

देहरादून, 11 सितम्बर। प्रदेश के सभी शासकीय और अशासकीय विद्यालयों का आपदा प्रबंधन प्लान तैयार किया जाएगा। जिसे लेकर सचिव आपदा प्रबंधन व पुनर्वास विनोद कुमार सुमन की अध्यक्षता में शिक्षा विभाग के अधिकारियों और सभी मुख्य शिक्षा अधिकारियों के साथ बैठक हुई। बैठक में विद्यालयों को अधिक सुरक्षित बनाने, आपदा के समय त्वरित व प्रभावी प्रतिक्रिया सुनिश्चित करने और सुरक्षा के लिए आवश्यक तैयारियों पर विस्तार से चर्चा की गई।

विनोद कुमार सुमन ने कहा कि प्रत्येक विद्यालय का आपदा प्रबंधन प्लान उस विद्यालय की स्थानीय भौगोलिक परिस्थितियों और संभावित जोखिमों के आधार पर तैयार किया जाएगा। इसके लिए विद्यालय स्तर पर स्थानीय आपदा जोखिमों का आकलन किया जाएगा। उसी के अनुरूप सुरक्षा व बचाव की कार्ययोजना तैयार की जाएगी। इसके लिए शिक्षा विभाग और यूएसडीएमए में समिति का गठन किया जाएगा।

विद्यालय व उसके आसपास के क्षेत्र में भूकंप, भूस्खलन, बाढ़, फ्लैश फ्लड, बादल फटना, अतिवृष्टि, हिमपात, हिमस्खलन, आग और अन्य आपदाओं की संभावित स्थिति का चिन्हांकन किया जाएगा। आपदा की स्थिति में विद्यार्थियों और स्टाफ को सुरक्षित स्थान तक पहुंचाने के लिए स्पष्ट निकासी मार्ग निर्धारित किए जाएंगे।

प्रत्येक कक्षा व भवन के लिए आवश्यक निकासी व्यवस्था और सुरक्षित स्थान चिन्हित किए जाएंगे। विद्यालय परिसर में आपदा के समय एकत्रित होने के लिए सुरक्षित स्थान निर्धारित किया जाएगा। आपदा की स्थिति में कौन क्या भूमिका निभाएगा, इसकी स्पष्ट जिम्मेदारी निर्धारित की जाएगी। विद्यालय प्रधानाचार्य, शिक्षक, शिक्षणेत्तर कर्मचारी और आवश्यकतानुसार विद्यार्थियों के स्तर पर भी जिम्मेदारियां तय की जाएंगी।

पुलिस, फायर, स्वास्थ्य विभाग, राज्य व जिला आपदा प्रबंधन प्राधिकरण, तहसील व अन्य संबंधित विभागों के महत्वपूर्ण आपातकालीन संपर्क नंबर विद्यालय स्तर पर उपलब्ध व प्रदर्शित किए जाएंगे। विद्यालय में प्राथमिक उपचार की आवश्यक व्यवस्था, फर्स्ट एड किट और आवश्यक आपदा राहत व बचाव सामग्री की उपलब्धता सुनिश्चित की जाएगी।

विद्यार्थियों व विद्यालय स्टाफ को भूकंप, आग, भूस्खलन और अन्य आपदाओं में सुरक्षित प्रक्रियाओं की जानकारी दी जाएगी। समय-समय पर मॉक ड्रिल आयोजित कर आपदा प्रबंधन प्लान की व्यवहारिकता को भी परखा जाएगा।

सचिव ने बताया कि दिव्यांग व विशेष आवश्यकता वाले विद्यार्थियों के सुरक्षित व त्वरित निकासी के लिए अलग से आवश्यक व्यवस्था और सहायता की पहचान की जाएगी। विद्यालय भवन, कक्षाओं, विद्युत व्यवस्था, गैस, रसोई, पानी की टंकियों, प्रयोगशालाओं, खेल मैदान और अन्य महत्वपूर्ण स्थानों की सुरक्षा संबंधी आवश्यकताओं का परीक्षण किया जाएगा। संभावित खतरों को कम करने के उपाय किए जाएंगे।

आपदा के समय विद्यालय व अभिभावकों के बीच प्रभावी संचार व्यवस्था विकसित की जाएगी। स्थानीय प्रशासन, ग्राम पंचायत, स्थानीय समुदाय व उपलब्ध संसाधनों को भी आवश्यकता के अनुसार आपदा प्रबंधन व्यवस्था से जोड़ा जाएगा।

प्रत्येक विद्यालय के आपदा प्रबंधन प्लान के तहत चेतावनी व सूचना टीम, निकासी टीम, प्राथमिक उपचार टीम, अग्नि सुरक्षा टीम, खोज व बचाव टीम और सहायता व मनोसामाजिक टीम का गठन किया जाएगा। जिनके जरिए आपदा के वक्त विद्यालय स्तर पर तत्काल समन्वित कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी। इन टीमों का नेतृत्व बच्चों द्वारा किया जाएगा, जबकि शिक्षक और स्टाफ उन्हें मार्गदर्शन व सहयोग प्रदान करेंगे।

बैठक में एसीईओ प्रशासन प्रकाश चंद्र, एसीईओ क्रियान्वयन डीआईजी राजकुमार नेगी, डीजी शिक्षा आकांक्षा कोण्डे, जेसीईओ दिनेश कुमार पुनेठा, डॉ. पी.डी माथुर आदि मौजूद रहे।

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