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उत्तराखंड: रोपवे प्रोजेक्ट्स की धीमी रफ़्तार से मुख्यमंत्री नाराज़

देहरादून, 24 अगस्त। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने प्रदेश की विभिन्न रोपवे परियोजनाओं की धीमी प्रगति पर नाराजगी जताई। उन्होंने कार्यदायी संस्थाओं को कहा कि राज्य स्थापना दिवस तक रोपवे परियोजनाओं के कार्य धरातल पर दिखाई देने चाहिए।

मुख्यमंत्री आवास में रोपवे परियोजनाओं की प्रगति की समीक्षा के दौरान मुख्यमंत्री ने कार्यदायी संस्थाओं को 15 दिन में प्रगति रिपोर्ट मुख्य सचिव को उपलब्ध कराने के निर्देश दिए। कहा कि वह इनकी प्रगति की फिर से समीक्षा करेंगे। स्पष्ट किया कि रोपवे परियोजनाओं के मामले में देरी मंजूर नहीं होगी।

मुख्यमंत्री ने संबंधित जिलाधिकारियों को निर्देश दिए कि वे अपने जनपदों में प्रस्तावित व निर्माणाधीन परियोजनाओं की नियमित मॉनिटरिंग करें। परियोजनाओं के क्रियान्वयन में भूमि, वन भूमि हस्तांतरण, विभागीय स्वीकृतियों अथवा अन्य स्तर पर जो भी समस्याएं आ रही हैं, उनके समाधान के लिए संबंधित विभाग और कार्यदायी संस्थाएं आपसी समन्वय से त्वरित कार्रवाई सुनिश्चित करें।

बैठक में राष्ट्रीय राजमार्ग लॉजिस्टिक्स मैनेजमेंट लिमिटेड (NHLML), उत्तराखण्ड मेट्रो रेल, शहरी अवस्थापना व भवन निर्माण निगम (UKMRC) और पर्यटन विभाग से संबंधित विभिन्न रोपवे परियोजनाओं की प्रगति की समीक्षा की गई। प्रस्तुतीकरण के अनुसार प्रथम चरण में NHLML की 11 और द्वितीय चरण में 6 प्रस्तावित रोपवे परियोजनाओं के साथ UKMRC से संबंधित परियोजनाओं की स्थिति पर भी चर्चा की गई।

मुख्यमंत्री ने केदारनाथ और हेमकुंट साहिब रोपवे परियोजनाओं की संबंधित प्रक्रियाओं में तेजी लाने के निर्देश दिए। प्रस्तुतीकरण के अनुसार केदारनाथ रोपवे परियोजना की लंबाई 12.90 किमी और हेमकुंट साहिब रोपवे परियोजना की लंबाई 12.40 किमी है।

मुख्यमंत्री ने नैनीताल रोपवे परियोजना से संबंधित कार्यवाही में तेजी लाने के निर्देश देते हुए कहा कि नैनीताल राज्य का प्रमुख पर्यटन स्थल है। पर्यटकों को बेहतर परिवहन सुविधा उपलब्ध कराने और यातायात के दबाव को कम करने की दिशा में रोपवे महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है।

मुख्यमंत्री ने देहरादून-मसूरी रोपवे परियोजना के कार्यों में तेजी लाने के निर्देश दिए। कहा कि मसूरी में विशेष रूप से पर्यटन सीजन के दौरान यातायात का अत्यधिक दबाव रहता है। रोपवे से पर्यटकों को वैकल्पिक व सुगम परिवहन सुविधा मिलने के साथ सड़क यातायात का दबाव कम करने में भी मदद मिलेगी।

यमुनोत्री, पूर्णागिरि और कुंजापुरी समेत अन्य प्रस्तावित रोपवे परियोजनाओं को लेकर निर्देश दिए कि इनके क्रियान्वयन में लंबित प्रक्रियाओं को प्राथमिकता से पूरा किया जाए। जिन मामलों में भूमि अथवा अन्य विभागीय स्तर पर कार्रवाई अपेक्षित है, संबंधित जिलाधिकारी उनमें प्रभावी समन्वय स्थापित कर तेजी से समाधान सुनिश्चित करें।

बैठक में हरिद्वार में प्रस्तावित इंटीग्रेटेड रोपवे परियोजना और त्रिवेणी घाट-नीलकंठ रोपवे से संबंधित प्रस्तावों पर भी चर्चा की गई। मुख्यमंत्री ने कहा कि सभी परियोजनाओं में यात्रियों की सुरक्षा, पर्यावरणीय संतुलन और भविष्य की आवश्यकताओं को ध्यान में रखते हुए कार्य किया जाए।

इस अवसर पर अवस्थापना अनुश्रवण परिषद के उपाध्यक्ष विश्वास डाबर, प्रमुख सचिव आर. मीनाक्षी सुंदरम, सचिव डॉ. पंकज कुमार पाण्डेय, धीराज गर्ब्याल आदि मौजूद रहे।

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