
देहरादून, 23 अगस्त। पूर्व मुख्यमंत्री एवं कांग्रेस नेता हरीश रावत ने गैरसैंण को लेकर राजनीतिक दलों की उदासीनता पर चिंता जताई है। कहा कि गैरसैंण को भुलाना उत्तराखंड की कल्पना और उसके संघर्ष को भुलाने जैसा है। उन्होंने कहा कि राजनीतिक एजेंडे से गैरसैंण और उससे जुड़े सवाल या तो गायब हो गए हैं या हाशिये पर चले गए हैं।
रावत ने अपने एक सपने का जिक्र करते हुए कहा कि आज भोर में एक अजीब सपने के साथ उनकी नींद खुली। सपने में न्यायिक कुर्सी पर बैठे एक व्यक्ति राजनीतिक लोगों को फटकारते हुए कह रहे थे कि गैरसैंण के नाम पर लोगों को बेवकूफ न बनाया जाए।
उन्होंने कहा कि उनके मन में यह सवाल आया कि राज्य के राजनीतिक विमर्श में गैरसैंण की चर्चा क्यों कम होती जा रही है। रावत ने कहा कि बेरोजगारी, खाली होते गांवों, बाघ, भालू और बंदरों समेत जंगली जानवरों के बढ़ते आतंक जैसे मसले राज्य के लोगों को झकझोर रहे हैं।
उन्होंने कहा कि जिन सवालों ने उत्तराखंड राज्य की कल्पना और उसके संघर्ष की नींव रखी, उनका राजनीतिक विमर्श में हाशिये पर जाना बेहद पीड़ादायक है। उन्होंने गैरसैंण समेत राज्य के मूल सवालों को फिर से राजनीतिक चर्चा के केंद्र में लाने की जरूरत बताई।



