हिमालय दिवस पर दिया जाएगा ‘हिमालय विभूति सम्मान’
मुख्यमंत्री धामी ने हिमालय परिषद् को ₹1 देने की घोषणा भी की

देहरादून, 7 अगस्त। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने वीर माधो सिंह भंडारी उत्तराखंड प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय में आयोजित ‘हिमालयो नाम नगाधिराजः’ कार्यक्रम के दौरान हिमालय परिषद् में मूलभूत सुविधाओं और संसाधनों में वृद्धि के लिए ₹1 करोड़ की धनराशि देने की घोषणा की। साथ ही हर वर्ष हिमालय के संरक्षण, संवर्धन और विकास के क्षेत्र में कार्यरत शोधकर्ताओं, वैज्ञानिकों, सामाजिक कार्यकर्ताओं और विशिष्ट व्यक्तित्वों को ‘हिमालय विभूति सम्मान’ प्रदान किया जाएगा।
मुख्यमंत्री धामी ने कहा कि हिमालय हमारी पहचान, संस्कृति और अस्तित्व का आधार है। आदिकाल से गंगा और यमुना समेत अनेक नदियों का उद्गम हिमालय से होता है। कहा कि जलवायु परिवर्तन और ग्लोबल वार्मिंग पूरी दुनिया के सामने बड़ी चुनौती हैं, इनका प्रभाव हिमालयी क्षेत्रों में भी दिखाई दे रहा है।
हिमालय के ग्लेशियर और जलस्रोत प्रभावित होने का असर नदियों, कृषि, पेयजल और करोड़ों लोगों के जीवन पर पड़ता है। इसलिए हिमालय संरक्षण का विषय पर्यावरण के साथ हमारे भविष्य से है। कहा कि नई पीढ़ी पर्यावरण को लेकर जागरूक है। आज युवा हिमालय, नदियों, जंगलों, स्वच्छ हवा और पानी जैसे विषयों पर गंभीरता से सोच रहे हैं। आने वाली पीढ़ियां हमसे केवल बड़ी इमारतों और चौड़ी सड़कों का हिसाब नहीं मांगेंगी, बल्कि स्वच्छ हवा, स्वच्छ पानी, नदियों और जंगलों का भी हिसाब मांगेंगी। इसलिए हमें आज ही तय करना होगा कि हम आने वाली पीढ़ियों को कैसा उत्तराखण्ड सौंपकर जाना चाहते हैं।
मुख्यमंत्री ने कहा कि पर्वतीय क्षेत्रों में सड़क, बिजली, अच्छी शिक्षा, स्वास्थ्य सुविधाओं और रोजगार की आवश्यकता है, लेकिन उत्तराखण्ड के विकास का मॉडल राज्य की अपनी भौगोलिक परिस्थितियों और आवश्यकताओं के अनुरूप होना चाहिए। उत्तराखण्ड के विकास का रास्ता इकोलॉजी और इकोनॉमी के संतुलन से होकर ही निकलेगा। हमें ऐसा विकास चाहिए जिसमें सड़क भी बने और जंगल भी बचें, रोजगार भी बढ़े और नदियां भी निर्मल रहें, पर्यटन भी बढ़े और पहाड़ों की धारण क्षमता का भी ध्यान रखा जाए।
मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में ‘नमामि गंगे’, ‘नेशनल मिशन फॉर सस्टेनिंग द हिमालयन इकोसिस्टम’ और ‘वाइब्रेंट विलेज प्रोग्राम’ जैसे प्रयासों के माध्यम से हिमालयी क्षेत्रों के संरक्षण और सतत विकास को गति दी जा रही है। राज्य सरकार भी उत्तराखंड को हिमालय संरक्षण की दिशा में मॉडल राज्य बनाने के संकल्प के साथ कार्य कर रही है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि हिमालय संरक्षण के लिए जनभागीदारी सबसे महत्वपूर्ण है। इसी उद्देश्य से 2 सितंबर के बुग्याल दिवस से 9 सितंबर के हिमालय दिवस तक पूरे सप्ताह को ‘हिमालय दिवस सप्ताह’ के रूप में मनाने की शुरुआत की गई है। हिमालय संरक्षण केवल सरकारी कार्यक्रमों और सेमिनारों तक सीमित न रहकर जन-जन का आंदोलन बनना चाहिए। उन्होंने कहा कि बुग्याल हमारी जैव विविधता और जल स्रोतों के महत्वपूर्ण आधार हैं, जंगल हमारी हवा, पानी और मिट्टी के रक्षक हैं तथा नदियां हमारी सभ्यता की जीवनधारा हैं।
इस दौरान सीएम धामी ने विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी से संबंधित पांच पोस्टरों का विमोचन किया। इनमें 7वें देहरादून इंटरनेशनल साइंस एंड टेक्नोलॉजी फेस्टिवल, साइंस एंड टेक्नोलॉजी प्रीमियर लीग, सीमांत बाल विज्ञान कांग्रेस, ज्ञानोत्कर्ष तथा 21वीं उत्तराखण्ड राज्य साइंस कॉन्फ्रेंस के पोस्टर शामिल हैं। मुख्यमंत्री ने विज्ञान के लोकप्रियकरण पर केंद्रित पत्रिका ‘विज्ञान संप्रेषण’ के पांचवें वार्षिकांक का भी विमोचन किया।
मौके पर विधायक किशोर उपाध्याय, पद्मभूषण डॉ. अनिल प्रकाश जोशी, कुलपति डॉ. तृप्ता ठाकुर, महानिदेशक यूकॉस्ट प्रो. दुर्गेश पंत, रजिस्ट्रार विवि डॉ. राजेश उपाध्याय, संयुक्त निदेशक यूकॉस्ट डीपी उनियाल आदि मौजूद रहे।



