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उत्तराखंड में मिशन मोड में हो स्टोन फ्रूट की बागवानी

दून लाइब्रेरी में आयोजित विमर्श में हरेला गांव-धाद ने जारी किया मांगपत्र

देहरादून। उत्तराखंड के हिमालयी क्षेत्रों में स्टोन फ्रूट्स की बागवानी ग्रामीण अर्थव्यवस्था को नई दिशा दे सकती है। इस क्षेत्र में मौजूद संभावनाओं को देखते हुए इसे अब मिशन मोड में आगे बढ़ाने की जरूरत है। यह बात दून लाइब्रेरी में हरेला गांव-धाद द्वारा आयोजित विमर्श में सामने आई। कार्यक्रम के दौरान संगठन ने स्टोन फ्रूट उत्पादन को प्रोत्साहित करने के लिए एक मांगपत्र भी जारी किया।

कार्यक्रम धाद संस्था के केंद्रीय अध्यक्ष लोकेश नवानी की अध्यक्षता में आयोजित किया गया। उन्होंने कहा कि धाद किसानों के हितों से जुड़े मुद्दों को लगातार शासन और समाज के समक्ष उठा रहा है। मुख्य वक्ता कुंदन सिंह पंवार ने कहा कि उनकी बागवानी यात्रा सेब उत्पादन से शुरू हुई थी, लेकिन जलवायु परिवर्तन और भौगोलिक चुनौतियों के कारण उन्हें कठिनाइयों का सामना करना पड़ा। इसके बाद उन्होंने विभिन्न स्टोन फ्रूट प्रजातियों को अपनाया, जिससे उन्हें बेहतर उत्पादन और पर्यटन सीजन में अच्छा बाजार मिला।

कृषक बागवान संगठन के अध्यक्ष बीरबान सिंह ने कहा कि लंबे समय तक सेब और अन्य फलों के उत्पादन व प्रसंस्करण से जुड़े रहने के बाद उन्होंने भी स्टोन फ्रूट्स की संभावनाओं को देखते हुए इस क्षेत्र में काम शुरू किया है।

उद्यान विशेषज्ञ डॉ. आरपी खुकसाल ने कहा कि स्टोन फ्रूट्स के उत्पादन में अपेक्षाकृत कम पानी और कीटनाशकों की आवश्यकता होती है। इनका उत्पादन उस समय होता है, जब उत्तराखंड में लाखों पर्यटक पहुंचते हैं, जिससे स्थानीय उत्पादकों को बड़ा बाजार उपलब्ध हो जाता है।

नीलेश नेगी ने कहा कि वर्ष 2025 में स्टोन फ्रूट्स पर एक माह तक चलाए गए विशेष अभियान के बाद धाद इस वर्ष भी इस पहल को आगे बढ़ा रहा है। स्टोन फ्रूट माह का उद्देश्य केवल चर्चा तक सीमित नहीं है, बल्कि किसानों, शिक्षाविदों, विशेषज्ञों और नीति-निर्माताओं को एक मंच पर लाकर इस महत्वपूर्ण फल समूह पर सार्थक संवाद स्थापित करना है।

सभा का संचालन हिमांशु आहूजा ने किया। मौके पर आलोक सरीन, ज्ञान प्रकाश गुप्ता, जयपाल सिंह बिष्ट, बृजमोहन उनियाल, उपेंद्र सिंह रावत, प्रदीप डिमरी, राकेश डिमरी, कुलभूषण नैथाणी, डॉ राकेश बलूनी, विनीता उनियाल, नीना रावत, आशा डोभाल, कांति करासी हृषिकेश ममगाईं, चंद्रशेखर जोशी, देवेन्द्र कांडपाल, डॉ लता प्रसाद, हिमांशु अवस्थी, अनूप नैथाणी, योगेश्वर पुरोहित, हर्षमणि व्यास, शैलेश भट्ट, चमनलाल शाह, डॉ सुनीता बौड़ाई, आशुतोष शर्मा, उत्तम सिंह रावत, एमएस रावत, शांति प्रकाश, नरेंद्र रावत, गणेश उनियाल, कुसुम, मनोहर लाल, इंदूभूषण सकलानी, सुरेंद्र अमोली आदि मौजूद रहे।

प्रमुख मांगें
• सेब और कीवी मिशन की तर्ज पर राज्य में ‘स्टोन फ्रूट्स मिशन’ शुरू किया जाए।
• उन्नत किस्मों एवं गुणवत्तापूर्ण पौधों की खरीद के लिए किसानों को प्रत्यक्ष लाभ अंतरण (डीबीटी) के माध्यम से आर्थिक सहायता दी जाए।
• स्थानीय स्तर पर हाईटेक नर्सरी स्थापित करने के लिए विशेष प्रोत्साहन दिया जाए।
• मौसम आधारित फसल बीमा योजना में ओलावृष्टि से हुई व्यक्तिगत क्षति का आकलन सेब की तरह आड़ू सहित अन्य स्टोन फ्रूट्स के लिए भी किया जाए।
• औद्यानिक विपणन परिषद को मजबूत किया जाए। सेब के साथ माल्टा, कीवी, आड़ू, प्लम और खुमानी के लिए भी पैकेजिंग सामग्री उपलब्ध कराई जाए।
• पहाड़ी क्षेत्रों के फल एवं सब्जी उत्पादकों को रोडवेज बसों की छतों पर न्यूनतम दरों पर ढुलाई सुविधा उपलब्ध कराई जाए।
• पहाड़ी बाजारों में उत्पादकों के लिए निःशुल्क विपणन केंद्र स्थापित किए जाएं।
• प्रमुख उत्पादन क्षेत्रों में खरीद केंद्रों की व्यवस्था सुनिश्चित की जाए।

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