
ऋषिकेश। एम्स की हेली इमरजेंसी मेडिकल सर्विस (HEMS) प्रदेश के सुदूरवर्ती क्षेत्रों के लिए जीवनरक्षक साबित हो रही है। इस सेवा के माध्यम से अब तक सैकड़ों लोगों को समय पर उपचार उपलब्ध कराया जा चुका है। विशेष रूप से दुर्घटनाओं और गंभीर आपात स्थितियों में ‘गोल्डन ऑवर’ के भीतर मरीजों को एम्स पहुंचाने में यह सेवा महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है।
पिछले एक वर्ष में ही 81 गंभीर मरीजों को हेली सेवा के जरिए अस्पताल पहुंचाकर उनकी जान बचाई गई। केंद्र और राज्य सरकार की साझेदारी से संचालित यह देश की पहली एयर एम्बुलेंस सेवा 29 अक्टूबर 2024 को पायलट प्रोजेक्ट के रूप में शुरू हुई थी, जो अब राज्य की आपातकालीन स्वास्थ्य व्यवस्था की मजबूत कड़ी बन चुकी है।
इस सेवा से प्रदेश के दुर्गम क्षेत्र से गंभीर मरीज को कम समय में एम्स लाना संभव हुआ है। खासकर ट्रॉमा और आपदा स्थितियों में इसका लाभ अधिक मिल रहा है। अब तक कुल 144 मरीज इस सेवा से लाभान्वित हो चुके हैं।
दुर्घटना के बाद भी जारी है सेवा
17 मई 2025 को केदारनाथ में ‘संजीवनी’ हेलीकॉप्टर दुर्घटनाग्रस्त होने के बावजूद हेली सेवा बाधित नहीं हुई। राज्य सरकार ने 18 मई 2025 से वैकल्पिक हेलीकॉप्टर उपलब्ध कराते हुए सेवा को निरंतर जारी रखा। हेम्स के नोडल अधिकारी डॉ. मधुर उनियाल ने बताया कि सहायता के लिए टोल फ्री नंबर 18001804278 और व्हाट्सएप नंबर 9084670331 जारी किए गए हैं।
ट्रॉमा और महिला मरीजों को बड़ा लाभ
29 अक्टूबर 2024 से 17 मई 2025 तक 63 मरीज
• ट्रॉमाः 27
• स्त्री एवं प्रसूतिः 17
• हृदय/मेडिसिनः 17
• नवजातः 2
18 मई 2025 से 25 अप्रैल 2026 तक 81 मरीज
• ट्रॉमाः 37
• स्त्री एवं प्रसूतिः 11
• मेडिसिनः 27
• बाल रोगः 6
यह बोली संस्थान की निदेशक
संस्थान की कार्यकारी निदेशक प्रो. मीनू सिंह ने कहा कि हेलीकॉप्टर से लाए गए अधिकांश मरीज गंभीर अवस्था में होते हैं। हेम्स के परिणाम बेहद सकारात्मक रहे हैं। चारधाम यात्रा के दौरान इसकी उपयोगिता और बढ़ने की संभावना है।



