भागवताचार्य हुए सम्मानित, धर्म-संस्कृति के संरक्षण पर मंथन

ऋषिकेश, 05 नवम्बर। ‘आपकी आवाज, हमारी प्रतिज्ञा’ कार्यक्रम के तहत आयोजित सम्मान समारोह में भागवताचार्यों और विद्वतजनों को सम्मानित किया गया। इस दौरान धर्म, संस्कृति, सामाजिक सरोकारों और सनातन परंपराओं से जुड़े विषयों पर चर्चा की गई। आचार्यों ने अपने महत्वपूर्ण सुझाव भी साझा किए।
कार्यक्रम संयोजक जयेंद्र रमोला ने कहा कि धर्माचार्य और विद्वतजन भारतीय संस्कृति, संस्कारों व सनातन परंपराओं के सच्चे संवाहक हैं। समाज को सही दिशा देने और नई पीढ़ी में नैतिक मूल्यों का संचार करने में उनका योगदान अतुलनीय है। उनका सम्मान करना सभी का सौभाग्य और दायित्व है।
उन्होंने कहा कि ‘आपकी आवाज, हमारी प्रतिज्ञा’ कार्यक्रम का उद्देश्य समाज के प्रत्येक वर्ग की बात सुनना और जनभावनाओं के अनुरूप सकारात्मक कार्य करना है। धर्माचार्यों के मार्गदर्शन से समाज और संस्कृति को नई दिशा देने के प्रयास जारी रहेंगे।
भागवताचार्य ओम प्रकाश पूर्वाल ने आयोजन की सराहना की, कहा कि भागवत कथा केवल धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि नैतिकता, सद्भाव, सेवा, समरसता और मानवता का संदेश देने का सशक्त माध्यम है। ऐसे आयोजनों से नई पीढ़ी को अपनी संस्कृति और परंपराओं से जुड़ने की प्रेरणा मिलती है।
इस अवसर पर आचार्य दयाकृष्ण, अमित कोठारी, वेदकिशोर सिलसवाल, देवेंद्र उनियाल, जगमोहन मिश्रा, जितेंद्र, केशव बहुगुणा, ललित त्रिपाठी, मनीराम पैन्यूली, मनोहर पांडे, आचार्य मनोज चमोली, मनोज गैरोला, मोहन भट्ट, नागेंद्र भद्री, नरेंद्र सकलानी, पंकज रयाल, पुरुषोत्तम राणाकोटी, राकेश प्रसाद बहुगुणा, शिव प्रसाद सेमवाल, सुभाष डोभाल, सुनील भट्ट, गिरीश पांडे, सुरेंद्र भट्ट, कृष्ण प्रसाद उनियाल, शंकर प्रसाद गैरोला, दीपक कृष्ण कुलियाल, राजेश जोशी, महानगर कांग्रेस अध्यक्ष ललित मोहन मिश्र, पूर्व शिक्षक मदन शर्मा, वरिष्ठ अधिवक्ता राकेश सिंह, बृजभूषण बहुगुणा, हिमांशु कश्यप आदि मौजूद रहे।



