देहरादूनः जमीनों के प्रकरणों पर सरकार ने दी सफाई

देहरादून, 4 नवंबर। उत्तराखंड निवेश एवं अवसंरचना विकास बोर्ड (UIIDB) को लेकर उठ रहे सवालों और सरकारी जमीनों के बड़े पैमाने पर निजी उपयोग के लिए दिए जाने संबंधी चर्चाओं पर सरकार ने स्थिति स्पष्ट की है।
प्रमुख सचिव आर. मीनाक्षी सुंदरम ने कहा कि बोर्ड के माध्यम से एसेट मॉनेटाइजेशन और पब्लिक प्राइवेट पार्टनरशिप के तहत निवेश आकर्षित करने की प्रक्रिया को लेकर कई भ्रामक जानकारियां प्रचारित की जा रही हैं। वास्तविकता यह है कि फिलहाल कुछ चुनिंदा भूमि पार्सल पर ही काम किया जा रहा है। कई ऐसी जमीनों और परिसंपत्तियों का नाम भी इस प्रक्रिया से जोड़ा जा रहा है, जिनका वर्तमान प्रस्तावों से कोई संबंध नहीं है।
प्रमुख सचिव ने स्पष्ट किया कि सरकार का उद्देश्य सरकारी संपत्तियों का मनमाना हस्तांतरण करना नहीं, बल्कि उपलब्ध संसाधनों का उत्पादक उपयोग कर प्रदेश में आर्थिक गतिविधियों, निवेश और रोजगार को बढ़ावा देना है। उन्होंने कहा कि इस संबंध में पूर्व में भी तथ्यों के साथ जानकारी दी गई है, लेकिन बार-बार भ्रामक धारणाएं बनाई जा रही हैं। इसलिए वास्तविक स्थिति सामने रखना जरूरी है।
उन्होंने बताया कि वर्तमान में चयनित भूमि पार्सल की संख्या सीमित है और आगामी दो से तीन माह में लगभग 6-7 भूमि पार्सल की बिडिंग प्रक्रिया आगे बढ़ाने का लक्ष्य है। इस पहल के तहत विशेष रूप से पर्यटन और हॉस्पिटैलिटी क्षेत्र में निवेश की संभावनाएं तलाशी जा रही हैं।
सुंदरम ने कहा कि इस पहल का उद्देश्य प्रदेश के युवाओं को अपने ही राज्य में रोजगार उपलब्ध कराने के साथ स्थानीय किसानों, कारोबारियों, टैक्सी संचालकों, हस्तशिल्पियों और होमस्टे संचालकों को आर्थिक गतिविधियों से जोड़ना है। कहा कि यूआईआईडीबी को लेकर किसी भी प्रकार की चर्चा अपुष्ट जानकारियों के बजाय वास्तविक प्रस्तावों और तथ्यों के आधार पर होनी चाहिए।
चौबटिया और धनोल्टी की जमीन प्रस्ताव से बाहर
सुंदरम ने विभिन्न स्थानों की जमीनों को लेकर हो रही चर्चाओं पर स्थिति स्पष्ट करते हुए कहा कि चौबटिया की भूमि की व्यवहार्यता का परीक्षण किया गया था, लेकिन उपयुक्त संभावनाएं नहीं मिलने के कारण इसे प्रस्ताव से हटा दिया गया। इसी तरह धनोल्टी की संबंधित भूमि वन भूमि होने के कारण प्रस्ताव से ड्रॉप कर दी गई थी।
एचएमटी की जमीन सिडकुल के पास
एचएमटी की भूमि को लेकर उन्होंने कहा कि यह सिडकुल के पास है और वह अपनी योजनाओं के अनुसार इस पर काम कर रहा है। इसका यूआईआईडीबी की वर्तमान प्रक्रिया से कोई संबंध नहीं है। वहीं, ऋषिकेश स्थित आईडीपीएल की जमीन वन भूमि है, अभी तक राज्य सरकार के किसी विभाग को हस्तांतरित भी नहीं हुई है।
लोनिवि रेस्ट हाउस पर भी नहीं मिली मंजूरी
प्रमुख सचिव ने पीडब्ल्यूडी रेस्ट हाउस को लेकर उठ रही चर्चाओं पर कहा कि कई परिसंपत्तियों के संबंध में न तो मंत्रिमंडल की स्वीकृति मिली है और न ही यूआईआईडीबी बोर्ड की ओर से कोई अनुमोदन दिया गया है। ऐसे में इन्हें प्रस्तावित योजनाओं का हिस्सा बताना तथ्यों के विपरीत है। किसी भी भूमि या परिसंपत्ति पर निर्णय निर्धारित प्रक्रिया और सक्षम स्तर से मंजूरी के बाद ही लिया जाता है।
हजारों लोगों को रोजगार की संभावना
उन्होंने कहा कि हॉस्पिटैलिटी सेक्टर में निवेश से 7,000 से 8,000 लोगों को प्रत्यक्ष और 10,000 से 15,000 लोगों को अप्रत्यक्ष रोजगार मिलने की संभावना है। इसके अलावा जीएसटी और अन्य माध्यमों से राज्य को प्रतिमाह करीब 300 करोड़ रुपये का राजस्व मिलने का अनुमान है।



