Dehradun: सौंग नदी की सेहत परखेगा बायो इंडिकेटर प्रोजेक्ट

देहरादून, 4 नवंबर। पूर्वी दून घाटी की जीवनरेखा सौंग नदी और उसकी पारिस्थितिकी को संरक्षित करने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल की गई है। स्प्रिंग एंड रिवर रिजुविनेशन अथॉरिटी (SARRA), उत्तराखंड के तहत सौंग नदी क्षेत्र में ’बायो इंडिकेटर प्रोजेक्ट’ शुरू किया गया है। इसके माध्यम से जैविक संकेतकों के आधार पर नदी के पानी की गुणवत्ता, तटीय आवासों और मानवीय गतिविधियों के प्रभावों का आकलन किया जाएगा।
भारतीय वन्यजीव संस्थान (WII) के पूर्व वरिष्ठ प्राध्यापक एवं वैज्ञानिक ‘जी’ डॉ. वीपी उनियाल के मार्गदर्शन में यह छह माह का अध्ययन पूरा किया जाएगा। इसके तहत पांच प्रमुख जीव-समूहों जलीय मैक्रोइनवर्टेब्रेट्स, मधुमक्खियों, ड्रैगनफ्लाई, डेम्सलफ्लाई और पक्षियों की विभिन्न प्रजातियों का अध्ययन होगा।
परियोजना के अंतर्गत सौंग नदी के उद्गम स्थल कद्दूखाल (टिहरी) से गंगा संगम स्थित टिहरी फार्म (देहरादून) तक लगभग 80 किलोमीटर क्षेत्र में सर्वे किया जाएगा। इसके लिए नदी को ऊपरी, मध्य और निचले तीन जोन में विभाजित किया गया है। प्रत्येक जोन में 12 स्थायी स्टेशन बनाए गए हैं। इस तरह कुल 36 स्थानों पर मानसून के बाद और मानसून से पहले दो चरणों में अध्ययन होगा। फील्ड सर्वे नवंबर से अप्रैल के बीच किया जाएगा।
अध्ययन से सौंग नदी का वैज्ञानिक आधार पर व्यापक बेसलाइन डेटाबेस तैयार होगा। इससे प्रस्तावित सौंग बांध, खनन और शहरीकरण जैसी गतिविधियों के नदी की पारिस्थितिकी पर पड़ने वाले प्रभावों का आकलन करने में मदद मिलेगी। साथ ही, प्राप्त निष्कर्ष नदी के दीर्घकालिक संरक्षण और प्रभावी नीतियां तैयार करने का आधार बनेंगे।



