देहरादून

साथ-साथ चल सकते हैं विकास और संरक्षणः राधाकृष्णन

उपराष्ट्रपति ने IGNFA में IFS अधिकारियों से किया संवाद

देहरादून, 19 अगस्त। उपराष्ट्रपति सीपी राधाकृष्णन ने इंदिरा गांधी राष्ट्रीय वन अकादमी में भारतीय वन सेवा के 2025-2027 बैच के परिवीक्षार्थियों और प्रशिक्षण प्राप्त कर रहे रॉयल भूटान वन सेवा के अधिकारियों को संबोधित किया।

उपराष्ट्रपति ने कहा कि विकसित भारत/2047 की दिशा में आगे बढ़ते हुए आने वाले महत्वपूर्ण दशकों में वे भारत के वनों, वन्यजीवों, जैव विविधता और बहुमूल्य प्राकृतिक संसाधनों के प्रबंधन की जिम्मेदारी संभालेंगे। कहा कि देश की पारिस्थितिकी सुरक्षा को सुदृढ़ करने और वर्ष 2070 तक शुद्ध-शून्य उत्सर्जन के लक्ष्य को प्राप्त करने में भारतीय वन सेवा का योगदान महत्वपूर्ण है।

उन्होंने कहा कि विकास और संरक्षण एक-दूसरे के विरोधी नहीं हैं और सदैव साथ-साथ चल सकते हैं। उन्होंने अधिकारियों से संरक्षण व विकास, पारिस्थितिकी सुरक्षा व आजीविका और वर्तमान आवश्यकताओं और भावी पीढ़ियों के हितों के बीच संतुलन स्थापित करने का आग्रह किया।

वानिकी में प्रौद्योगिकी की बढ़ती भूमिका को रेखांकित करते हुए उन्होंने नई पीढ़ी के अधिकारियों से क्षेत्रीय अनुभव, विवेकपूर्ण निर्णय क्षमता और लोगों के प्रति संवेदनशीलता के साथ रिमोट सेंसिंग, जीआईएस, ड्रोन, एआई और डेटा-आधारित प्रणालियों को समन्वित करने का आह्वान किया।

उन्होंने वन सेवाओं में महिलाओं की बढ़ती भागीदारी का भी उल्लेख किया। बताया कि वर्तमान बैच में लगभग 17 प्रतिशत महिलाएं हैं। उन्होंने इसे एक उत्साहजनक बदलाव और नारी शक्ति का प्रमाण बताया। उन्होंने अधिकारियों से सदैव राष्ट्रहित को सर्वोपरि रखने का आह्वान करते हुए कहा कि “राष्ट्र प्रथम”।

इस अवसर पर राज्यपाल लेफ्टिनेंट जनरल गुरमीत सिंह (सेवानिवृत्त), मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी, आईजीएनएफए के निदेशक डॉ. राजेंद्र प्रसाद, कोर्स निदेशक अजीता लोंगजाम आदि मौजूद रहे।

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back to top button