साहित्य
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रमेश, ईश्वर और उत्तम को मिलेगा सम्मान
नई दिल्ली (शिखर हिमालय डेस्क)। उत्तराखंड लोक भाषा साहित्य मंच ने साहित्य, पत्रकारिता और लोकभाषा के क्षेत्र में महाकवि कन्हैयालाल…
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संघर्षशील पिता की कथा है ‘कारी तू कब्बी ना हारी’
यह दीप अकेला स्नेह भरा, है गर्व भरा मदमाता पर, इसको भी पंक्ति को दे दो। यह वह विश्वास नहीं…
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गज़ल (गढ़वाली)
दुन्यांदरि को म्वाल भौ बिंगणि रैंद जिंदगि । कभि मैंगी कभि सस्ति बिकणि रैंद जिंदगि ।। उत्यड़ौ फर उत्यड़ा अर…
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क्या कहें? (हिन्दी कविता)
ये दौर हैंजब आप किसीसुबह को ढलती रात के साए की तरह देखते हैंउजली सी रात सेविदा लेते हुए पल…
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बता दियां भारै मिथै भी?
• केशव डुबर्याळ “मैती“मुंड मलासणौ,सबी तैयार छन,पर कै थै असप्ताळम,मुंडरा गोळी भी मील होली,बता दियां भारे मिथै भी?वन त समाजसेवी,बिंडी…
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लिंगुड़ बेचते लड़कों!
• अनिल कार्कीओ लिंगुड़ बेचते लड़कोंहरे रहनाथोड़ा नरम भीआदम फर्न की कोपलों साजब तुम दुनिया के बारे में जानोगे तुम्हें…
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