
ऋषिकेश। अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) उत्तराखंड में अंगदान और प्रत्यारोपण के क्षेत्र में एक नई उम्मीद बनकर उभरा है। संस्थान के जन-जागरूकता अभियानों के सुखद परिणाम सामने आने लगे हैं। अप्रैल 2023 में किडनी ट्रांसप्लांट सेवा शुरू होने के बाद से अब तक संस्थान में 22 सफल किडनी ट्रांसप्लांट किए जा चुके हैं।
नेफ्रोलॉजी विभाग की डॉ. शैरोन कंडारी और यूरोलॉजी विभागाध्यक्ष डॉ. अंकुर मित्तल ने बताया कि जागरूकता बढ़ने से लोग अब अपने प्रियजनों को नया जीवन देने के लिए आगे आ रहे हैं। आंकड़ों के अनुसार, वर्ष 2024 में 06 और वर्ष 2025 में रिकॉर्ड 14 किडनी ट्रांसप्लांट सफलतापूर्वक संपन्न हुए।
एम्स की निदेशक प्रो. (डॉ.) मीनू सिंह ने कहा, अंगदान एक महान और जीवनरक्षक कार्य है। भारत में प्रत्यारोपण की प्रतीक्षा सूची लंबी है, जिसे केवल सामाजिक जागरूकता से ही कम किया जा सकता है। एक व्यक्ति का अंगदान कई लोगों को स्वस्थ जीवन जीने का अवसर देता है।
मृत्यु के बाद भी जीवित रहने की मिसाल
पिछले दो वर्षों में एम्स ऋषिकेश में दो महत्वपूर्ण ’केडवरिक ऑर्गन डोनेशन’ (ब्रेन डेड घोषित मरीजों द्वारा अंगदान) हुए हैं। अगस्त 2024 में कांवड़ यात्रा के दौरान घायल सचिन (25 वर्ष) के परिजनों ने अंगदान का निर्णय लिया, जिससे किडनी, पेनक्रियाज और लीवर दिल्ली व चंडीगढ़ के अस्पतालों में जरूरतमंदों को भेजे गए। वहीं जनवरी 2026 में सड़क दुर्घटना में घायल रघु के परिजनों ने साहस दिखाते हुए हृदय, किडनी और लीवर जैसे महत्वपूर्ण अंग दान किए, जिससे कई राज्यों के मरीजों को नई जिंदगी मिली।
आई बैंक रोशनी फैलाने में आगे
संस्थान के आई बैंक ने कॉर्निया प्रत्यारोपण में उल्लेखनीय कार्य किया है। साल 2019 से 2026 तक संस्थान को
1,246 कॉर्निया प्राप्त किए। जिनमें से 619 का सफल प्रत्यारोपण कर मरीजों की आंखों की रोशनी लौटी। जबकि 308 कॉर्निया अन्य जरूरतमंद संस्थानों को भेजे गए।
देहदान और अन्य आंकड़े
संस्थान के शरीर रचना विभाग के अनुसार वर्ष 2012 से अब तक 101 देहदान हो चुके हैं। जबकि 115 लोगों ने देहदान का संकल्प पत्र भरा है। इसके अतिरिक्त एम्स ने 2018 से अब तक 54 पार्थिव शरीरों के परिवहन (Transport Involving) में मदद की है, जिनमें लंदन, कनाडा और सिंगापुर के विदेशी नागरिक भी शामिल हैं।



