गढ़वाली

गढ़वाली काव्यकृति ‘वींणा मा देख्यां स्वीणा’ लोकार्पित

देहरादून। दून पुस्तकालय एवं शोध केंद्र में काव्यांश प्रकाशन से प्रकाशित मधुर वादिनी तिवारी के पहले गढ़वाली काव्य संग्रह ‘वींणा मा देख्यां स्वीणा’ का लोकार्पण किया गया। इस अवसर पर वक्ताओं ने गढ़वाली भाषा और संस्कृति को सहेजने के लिए साहित्यिक रचनाकर्म जारी रखने पर जोर दिया।

गढ़वाल विश्वविद्यालय के लोककला एवं संस्कृति निष्पादन केंद्र के निदेशक गणेश खुगशाल गणी की अध्यक्षता में आयोजित कार्यक्रम में वरिष्ठ पत्रकार सोमवारी लाल उनियाल और पद्मश्री कल्याण सिंह रावत ने किताब को लोकार्पित किया। रावत ने समाज के लिए संस्कृति और प्रकृति दोनों को बचाने की जरूरत बताई। साहित्यकार सुमित्रा जुगलान ने कहा कि मधुर वादिनी तिवारी ने रचनाओं के माध्यम से विलुप्त होते गढ़वाली शब्दों को संरक्षित करने का भी प्रयास किया है।

वरिष्ठ पत्रकार सोमवारी लाल उनियाल ने कविता संग्रह के शीर्षक को यथार्थ के दर्शन कराने वाला बताया, साथ ही लेखिका को निरन्तर लिखते रहने की सलाह दी। गणेश खुगशाल गणी ने कहा कि मधुर वादिनी तिवारी की साहित्यिक सक्रियता के फलस्वरूप उनकी रचनाओं में परिपक्वता दिख रही है। साथ ही गढ़वाली भाषा को न छोड़ने की अपील करते हुए कहा कि मातृभाषा की उपेक्षा आने वाले समय में हमें भाषाई तौर पर विपन्न बना देगी।

कवयित्री बीना बेंजवाल ने कहा कि यह पुस्तक मुख्य रूप से स्त्री विमर्श और स्त्री चेतना की कविताओं पर केंद्रित है। कांता घिल्डियाल ने कहा कि मधुर वादिनी की रचनाओं में ठेट गढ़वाली शब्दों से साफ है कि कवयित्री ने अपने गांव, अपनी थाती को नहीं छोड़ा।

कार्यक्रम में कविता मैठाणी भट्ट ने मधुर वादिनी की एक रचना ’मायादार आंख्यू मा माया लुकाईं च… का पाठ किया। वहीं, विपुल तिवारी, ज्योत्सना जोशी, उपासना, चंडी प्रसाद तिवारी, रजत पांडे ने भी अपने विचार साझा किए।

इस अवसर पर चंद्रशेखर तिवारी, शिव प्रसाद सेमवाल, मुकेश नौटियाल, बेलीराम कंसवाल, बलबीर राणा अडिग, स्नेहलता डंगवाल, इंदु डंगवाल, युद्धवीर नेगी, विनोद बडोनी, आलोक डंगवाल, विनोद बडोनी, प्रदीप कोठियाल, मदन मोहन डुकलाण, नंदन राणा नवल, रमाकांत बेंजवाल, शांति प्रकाश जिज्ञासू, डॉ सुनील थपलियाल, डॉ शैलेंद्र मैठाणी, अनिल नेगी, सुंदर बिष्ट, विनीता मैठाणी, रिद्धि भट्ट, अंजना कंडवाल, प्रेमलता सजवाण, बीना कंडारी, अरविंद प्रकृति प्रेमी, मनोज इष्टवाल, मदन मोहन कंडवाल, प्रबोध उनियाल, गिरीश बडोनी, आशीष सुंदरियाल आदि मौजूद रहे।

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