Uncategorized

उत्तराखंडः ऐतिहासिक 54 धारा-नौलों का होगा पुनरुद्धार

SARRA की बैठक में जल विरासत को संरक्षित करने पर हुआ मंथन

देहरादून, 28 सितम्बर। उत्तराखण्ड की प्राचीन जल विरासत को संरक्षित करने की दिशा में स्प्रिंग एंड रिवर रिजुवेनेशन अथॉरिटी (SARRA) ने पारंपरिक धारा-नौलों का वैज्ञानिक, वास्तु कलात्मक संरक्षण एवं पुनरुद्धार विषय पर तकनीकी कार्यशाला आयोजित की। इसमें प्रदेशभर से आए सोशल कॉर्डिनेटर्स और कनिष्ठ अभियंताओं ने प्रतिभाग किया।

जलागम प्रबंधन निदेशालय में आयोजित कार्यशाला में सारा की एसीईओ कहकशां नसीम ने कहा कि धारा-नौले केवल जलापूर्ति के स्रोत नहीं, बल्कि उत्तराखंड की सांस्कृतिक पहचान और प्राचीन स्थापत्य कला के जीवंत प्रतीक हैं। उन्होंने स्थानीय समुदायों की भागीदारी से इस संरक्षण अभियान को जन-आंदोलन बनाने का आह्वान किया।

यूकॉस्ट के महानिदेशक डॉ. दुर्गेश पंत ने कहा कि पारंपरिक जलस्रोतों का पुनरुद्धार वैज्ञानिक व पारिस्थितिकीय प्रक्रिया है। उन्होंने स्प्रिंगशेड प्रबंधन, रिचार्ज ज़ोन के वैज्ञानिक अध्ययन, चाल-खाल और हाइड्रो-जियोलॉजिकल तकनीकों के समन्वय पर बल दिया।

कार्यशाला में एचएनबी गढ़वाल विश्वविद्यालय के डॉ. नागेंद्र रावत ने ‘ज़ीरो-सीमेंट स्ट्रक्चरल इंजीनियरिंग’ पर बताया कि प्राचीन नौलों में बिना सीमेंट के पत्थरों की कॉर्बेलिंग और लोड-बेयरिंग तकनीक संरचनाओं को भूकंपीय झटकों से सुरक्षित रखती है।

वहीं इनटेक की विरासत संरक्षण विशेषज्ञ अंजलि भरथरी तथा यूनेस्को सम्मानित संरक्षण वास्तुकार ए. विजया ने पारंपरिक सामग्री परीक्षण, साइट मैपिंग और अंतरराष्ट्रीय संरक्षण मानकों पर तकनीकी जानकारी साझा की।

कार्यशाला के पहले चरण में राज्य के 54 ऐतिहासिक व पारंपरिक धारा-नौलों के पुनरुद्धार की कार्ययोजना पेश की गई। कनिष्ठ अभियंताओं को स्पष्ट निर्देश दिए गए कि मूल पत्थर की चिनाई और ऐतिहासिक ढांचे के साथ किसी प्रकार की सीमेंट आधारित छेड़छाड़ नहीं की जाएगी। साथ ही सोशल कॉर्डिनेटर्स को जियो-टैगिंग, जीआईएस मैपिंग, डेटा संग्रहण तथा ग्राम पंचायतों के सहयोग से रिचार्ज ज़ोन में चाल-खाल एवं कंटूर ट्रेंच निर्माण का प्रशिक्षण दिया गया।

एसएआरआरए की इस पहल से उत्तराखण्ड की प्राचीन जल-संस्कृति, पारंपरिक ‘जल मंदिर’ वास्तुकला और आधुनिक भू-जल विज्ञान के समन्वित संरक्षण की दिशा में एक मजबूत राज्य स्तरीय आधार तैयार हुआ है।

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back to top button