एससी-एसटी अत्याचार मामलों के निस्तारण के निर्देश

देहरादून, 22 सितम्बर। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी की अध्यक्षता में मंगलवार को सचिवालय में अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति (अत्याचार निवारण) अधिनियम, 1989 के प्रभावी क्रियान्वयन के लिए गठित राज्य स्तरीय सतर्कता एवं निगरानी समिति की बैठक हुई। मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को अधिनियम से जुड़े मामलों का समयबद्ध निस्तारण सुनिश्चित करने के निर्देश दिए।
मुख्यमंत्री ने वर्ष 2024 से अब तक लंबित विवेचनाओं की समीक्षा कर उनके निस्तारण में आ रही अड़चनों को दूर करने को कहा। लंबे समय से लंबित और गंभीर मामलों में पुलिस, प्रशासन व अभियोजन विभाग को समन्वय से कार्रवाई करने के निर्देश दिए। विशेष न्यायालयों में लंबित मामलों की भी नियमित समीक्षा और प्रभावी पैरवी के लिए आवश्यकतानुसार विशेष लोक अभियोजकों की उपलब्धता सुनिश्चित करने को कहा।
उन्होंने पीड़ितों को अनुमन्य राहत राशि के भुगतान में देरी न करने के निर्देश दिए। प्रभावित परिवारों को आर्थिक सहायता के साथ चिकित्सा, शिक्षा, सुरक्षा, पुनर्वास और अन्य पात्र योजनाओं से जोड़ने पर भी जोर दिया। गंभीर मामलों में पीड़ित और उनके परिवार की सुरक्षा को प्राथमिकता देने और बच्चों की पढ़ाई प्रभावित न होने देने के निर्देश दिए।
मुख्यमंत्री ने प्रत्येक जिले में मामलों की निगरानी के लिए वरिष्ठ अधिकारियों की जवाबदेही तय करने और पुलिसकर्मियों को अधिनियम के प्रावधानों व संवेदनशील मामलों की विवेचना का नियमित प्रशिक्षण देने को कहा। मामलों, न्यायालयीन स्थिति और राहत राशि की निगरानी के लिए डिजिटल मॉनिटरिंग सिस्टम विकसित करने के निर्देश भी दिए।
बैठक में बताया गया कि 2024 में 189, 2025 में 157 और 15 सितम्बर 2026 तक 116 अभियोग दर्ज हुए। 2026 के मामलों में 25 विवेचनाधीन हैं। वर्ष 2024-25 में 205 पीड़ितों को 228.71 लाख, 2025-26 में 127 पीड़ितों को 143.16 लाख और 18 सितम्बर 2026 तक 104 पीड़ितों को 99.528 लाख रुपये की सहायता दी गई।
बैठक में समाज कल्याण मंत्री खजान दास, विधायक ममता राकेश, सचिव गृह शैलेश बगौली, सचिव समाज कल्याण श्रीधर बाबू अद्दांकी, सचिव एवं आयुक्त राजस्व परिषद रंजना राजगुरू, अपर पुलिस महानिदेशक एपी अंशुमन, आईजी बरिंदरजीत सिंह, निदेशक समाज कल्याण संजय कुमार, निदेशक जनजाति कल्याण संजय टोलिया आदि अधिकारी मौजूद रहे।



