
ऋषिकेश, 8 सितम्बर। अपनी धरोहर न्यास की ओर से आयोजित ‘धरोहर संवाद’ के पहले दिन पारंपरिक पहाड़ी व्यंजनों, लोक वाद्यों और सांस्कृतिक परंपराओं पर चर्चा के साथ संरक्षण पर जोर दिया गया।
मंगलवार को मुनिकीरेती स्थित स्वामीनारायण आश्रम में दो दिनी धरोहर संवाद का शुभारंभ यूकेएसएसएससी के चेयरमैन गणेश सिंह मार्तोलिया, राज्य महिला आयोग अध्यक्ष कुसुम कंडवाल, मुनिकीरेती पालिकाध्यक्ष नीलम बिजल्वाण, आश्रम के महंत सुनील भगत और कार्यक्रम के व्यवस्था प्रमुख राजेश भट्ट ने किया।
मुख्य अतिथि गणेश सिंह मार्तोलिया ने कहा कि पलायन की चुनौती के बीच उत्तराखंड में संस्कृति और परंपराओं का संरक्षण बड़ी चुनौती है। ऐसे आयोजन लोगों को अपनी सांस्कृतिक जड़ों की ओर लौटने के लिए प्रेरित करते हैं।
कार्यक्रम के पहले दिन मधु असवाल ने पारंपरिक पहाड़ी भोजन और व्यंजनों का महत्व बताया। साथ ही खानपान को स्थानीय अर्थव्यवस्था और संस्कृति से जोड़ने की संभावनाओं पर प्रकाश डाला।
पारंपरिक वाद्य संस्कृति सत्र में चंद्रबदनी से डॉ. सोहनलाल ने तांबे के ढोल, बूढ़ा केदार से बचन दास ने चांदी के ढोल तथा बागेश्वर से मोहन दास और विजय सार ने लकड़ी के ढोल पर प्रस्तुति दी। वहीं अल्मोड़ा से जागर विशेषज्ञ सुंदर दास ने हुड़के पर प्रस्तुति से लोक परंपरा को दर्शाया।
इसबीच वाद्यों यंत्रों की विशेषताओं, निर्माण, वादन कला की जानकारी साझा कर उनके सांस्कृतिक महत्व को नई पीढ़ी तक पहुंचाने का प्रयास किया गया। मौके पर न्यास द्वारा स्मारिका का विमोचन भी किया गया।
न्यास अध्यक्ष विजय भट्ट ने बताया कि संस्था उत्तराखंड के पारंपरिक ढोल-दमाऊ और संस्कृति के संरक्षण पर लगातार काम कर रही है। कहा कि संस्था का उद्देश्य संस्कृति संवर्धन से जुड़ी यात्राओं और आयोजनों से देशभर के लोगों को उत्तराखंड की सांस्कृतिक विरासत से जोड़ना है।
मौके पर मेयर शंभू पासवान, आरएसएस के प्रांत कार्यवाह दिनेश सेमवाल, टीएचडीसी के मुख्य तकनीकी अधिकारी एलपी जोशी, जीएस पटवाल, चंपावत के गोल्ज्यू उपासक श्याम सिंह कार्की, सुनीता पंवार, डॉ. प्रमोद उनियाल, संस्कृतिकर्मी प्रो. डीआर पुरोहित, डॉ. नवीन पंत आदि मौजूद रहे।



