साहित्य
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लाठु खुज्याणी छै किलै (गढ़वाली ग़ज़ल)
लत्यों-लत्योंल् लत्याणी छै किलैआँखोंल् मुछ्यळा चुटाणी छै किलैदे छयो त्वैथई समळौण्या रुमालवैथै च्याँ गुज्यर चुटाणी छै किलैप्यार का बुज्यों मा…
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वा (गढ़वाली कविता)
वा बंण म घास कटदअर बंण हौर हैरो ह्वे जांद वींका आंख्यूं आंसू ब्वगद अर समोदर हौर गैरो ह्वे जांदवा…
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पहाड़, नदियां और बादल (हिंदी कविता)
पहाड़/ सह सकते हैं जब तक/ कुछ नहीं कहतेमगर वे ग़ैर ज़रूरी सिर पर चढ़े जाने या छाती पर सवार…
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आज भी (हिन्दी कविता)
• धनेश कोठारी आज भीफिर फूल चढ़ा आए होंगे तुमआदत जो बन गई है तुम्हारीइन्हीं फूलों से शायद लक्ष्मण रेखा…
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रमेश, ईश्वर और उत्तम को मिलेगा सम्मान
नई दिल्ली (शिखर हिमालय डेस्क)। उत्तराखंड लोक भाषा साहित्य मंच ने साहित्य, पत्रकारिता और लोकभाषा के क्षेत्र में महाकवि कन्हैयालाल…
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संघर्षशील पिता की कथा है ‘कारी तू कब्बी ना हारी’
यह दीप अकेला स्नेह भरा, है गर्व भरा मदमाता पर, इसको भी पंक्ति को दे दो। यह वह विश्वास नहीं…
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गज़ल (गढ़वाली)
दुन्यांदरि को म्वाल भौ बिंगणि रैंद जिंदगि । कभि मैंगी कभि सस्ति बिकणि रैंद जिंदगि ।। उत्यड़ौ फर उत्यड़ा अर…
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क्या कहें? (हिन्दी कविता)
ये दौर हैंजब आप किसीसुबह को ढलती रात के साए की तरह देखते हैंउजली सी रात सेविदा लेते हुए पल…
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बता दियां भारै मिथै भी?
• केशव डुबर्याळ “मैती“मुंड मलासणौ,सबी तैयार छन,पर कै थै असप्ताळम,मुंडरा गोळी भी मील होली,बता दियां भारे मिथै भी?वन त समाजसेवी,बिंडी…
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लिंगुड़ बेचते लड़कों!
• अनिल कार्कीओ लिंगुड़ बेचते लड़कोंहरे रहनाथोड़ा नरम भीआदम फर्न की कोपलों साजब तुम दुनिया के बारे में जानोगे तुम्हें…
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