
ऋषिकेश, 9 सितम्बर। अपनी धरोहर न्यास के तत्वाधान में मुनिकीरेती स्थित स्वामीनारायण आश्रम में ढोल विधाओं की प्रस्तुति के साथ दो दिनी धरोहर संवाद कार्यक्रम संपन्न हो गया।
कार्यक्रम का शुभारंभ आरएसएस के प्रांत कार्यवाह दिनेश सेमवाल, संस्कृतिकर्मी प्रो. डीआर पुरोहित, साहित्यकार गणेश खुगशाल ’गणी’ और महंत रामकृष्ण महाराज ने किया। सेमवाल ने कहा कि उत्तराखंड के ढोल और परंपराओं के प्रति जागरूकता की दिशा में संस्था का प्रयास सराहनीय है।
प्रो. डीआर पुरोहित ने कहा कि ढोली को सम्मान और पैसा देना होगा, तभी यह परंपरा बचेगी। हमें अब ढोल को आजीविका के साथ जोड़ने की जरूरत है, ताकि लुप्त हो रही कलाओं व रहस्यों को कायम रखे जा सकें। संस्था अध्यक्ष विजय भट्ट ने कहा कि यह कार्यक्रम ढोल-दमाऊ के सांस्कृतिक महत्व को सामने लाने का प्रयास है। गणेश खुगशाल ’गणी’ ने ढोल के इतिहास, परंपराओं व लोक में इसके महत्व पर प्रकाश डाला।
ढोल दमाऊ की प्रस्तुतियां रही आकर्षण
कार्यक्रम का मुख्य आकर्षण पारंपरिक ढोल विधाओं की प्रस्तुति रही। टिहरी के ढोलवादक डॉ. सोहनलाल ने बताया, ढोल वादन में 750 से अधिक तालों से वार्तालाप किया जा सकता है। उन्होंने इसका प्रदर्शन भी किया। बागेश्वर के मोहन दास ने लकड़ी के ढोल के साथ कई प्राचीन कलाओं व जागरों की प्रस्तुति दी। बूढ़ाकेदार से बचन दास और अल्मोड़ा से आए सुंदर दास ने हुड़के ने लुप्त लोक रचनाओं को पेश किया। माणा गांव के कुंदन सिंह कपोला ने महिला टीम के साथ कार्यक्रम में शिरकत की।
यह रहे कार्यक्रम में मौजूद
कार्यक्रम कर संचालन नीलम ध्यानी जुयाल ने किया। मौके पर संस्था के महामंत्री दिनेश बम, डॉ. श्याम सिंह कार्की, राजेश भट्ट, वीरेंद्र बिष्ट, कमल जीना,एलपी जोशी, सुनीता पंवार, मधु असवाल, डॉ. नवदीप जोशी, संजय शास्त्री, डीबीपीएस रावत, सुरेंद्र रावत आदि।



