हिमालय के संरक्षण के हिसाब से बनानी होंगी नीतियांः ऋतु खंडूड़ी
हिमालय दिवस पर विशेषज्ञों ने सीमांत क्षेत्रों में पलायन पर जताई चिंता

देहरादून, 9 सितम्बर। हिमालय दिवस पर उत्तरांचल उत्थान परिषद और एमकेपी (पीजी) कॉलेज के तत्वावधान में हिमालयः सतत विकास, चुनौतियां एवं समाधान विषय पर विचार गोष्ठी आयोजित की गई।
कार्यक्रम का शुभारंभ विधानसभा अध्यक्ष ऋतु खंडूड़ी भूषण, भारतीय तटरक्षक दल की अतिरिक्त महानिदेशक डॉ. कृपा नौटियाल, वाडिया हिमालय भू-विज्ञान संस्थान के वरिष्ठ वैज्ञानिक डॉ. आरजे पैरुमल और प्राचार्या प्रो. ममता सिंह ने किया। खंडूड़ी ने कहा कि हिमालय केवल पर्वत श्रृंखला नहीं, बल्कि सभ्यता और संस्कृति का आधार है। हमें हिमालय के वाशिंदों की समस्याओं को समझते हुए विकास की नीतियां तैयार करनी होंगी। उन्होंने पर्यावरण संरक्षण के लिए पारंपरिक संस्कृति और जीवनशैली को अपनाने पर जोर दिया।
डॉ. कृपा नौटियाल ने कहा कि सीमावर्ती क्षेत्र देश की सुरक्षा की दृष्टि से बेहद महत्वपूर्ण हैं। सीमांत गांवों से पलायन चिंता का विषय है। इसे रोकने के लिए गंभीर प्रयास आवश्यक हैं। वैज्ञानिक डॉ. आरजे पैरुमल ने हिमालयी क्षेत्र में भूकंप की तीव्रता और संभावित संवेदनशील क्षेत्रों की जानकारी दी।
प्राचार्या प्रो. ममता सिंह ने कहा कि विकास योजनाओं में पर्यावरणीय क्षति और स्थानीय समाज पर पड़ने वाले प्रभाव का आकलन जरूरी है। कार्यक्रम में छात्राओं ने भी अपने विचार रखे। इस दौरान पोस्टर प्रतियोगिता के विजेताओं को पुरस्कृत भी किया गया।
कार्यक्रम में परिषद के केंद्रीय कार्यकारिणी सदस्य नरेश चन्द्र कुलाश्री, डीएन उनियाल, विपुल जोशी, पर्यावरणविद् जगदीश बाबला, डॉ. कुसम नौटियाल, उषा रावत, डॉ. नीता कुकरेती, राजकुमार टोंक, चरण सिंह कंडारी आदि मौजूद रहे।



