सियासतः 70 सीटों पर मैदान में अकेले उतरेगी यूकेडी
• 2027 के लिए ’संकल्प, नए उत्तराखंड का’ नीतिगत एजेंडा जारी

• उत्तराखंड में भूमि कानून, मूल निवास और अनुच्छेद 371 पर दांव
देहरादून, 2 अगस्त। उत्तराखंड क्रांति दल (UKD) ने 2027 के विधानसभा चुनाव का सभी 70 सीटों पर अकेले लड़ने का ऐलान किया है। दल ने इसके लिए ’संकल्प, नए उत्तराखंड का’ नीतिगत एजेंडा जारी किया।
रविवार को परेड ग्राउंड स्थित एक रेस्टोरेंट में आयोजित कार्यक्रम में यूकेडी के केंद्रीय अध्यक्ष सुरेंद्र कुकरेती और पूर्व विधायक काशी सिंह ऐरी ने पार्टी का नीतिगत एजेंडा जारी किया। कुकरेती ने कहा कि राज्य गठन के बाद उत्तराखंड अपेक्षित विकास से वंचित रहा है। यूकेडी अब सुशासन और स्वशासन के संकल्प के साथ प्रदेश की जनता के हितों के अनुरूप शासन व्यवस्था स्थापित करने के लिए प्रतिबद्ध है।
पार्टी ने अपने एजेंडे में पांच प्रमुख प्राथमिकताएं तय की हैं। इनमें उत्तराखंड के लिए अनुच्छेद 371 के तहत विशेष संवैधानिक प्रावधान, मूल निवास को कानूनी मान्यता, राज्य-विशिष्ट व्यापक भू-कानून, पर्वतीय क्षेत्रों में रोजगार और विकास के जरिए पलायन रोकना और अनुसूचित जाति एवं जनजाति के आरक्षण लाभों का न्यायसंगत वितरण शामिल हैं।
पार्टी नेताओं का कहना है कि उत्तराखंड के मूल निवासियों ने पीढ़ियों से राज्य की संस्कृति, प्राकृतिक संसाधनों और पर्यावरण की रक्षा की है, लेकिन विकास के लाभों में उन्हें पर्याप्त हिस्सेदारी नहीं मिली।
उन्होंने मूल निवास व्यवस्था के तहत राज्य सरकार की नौकरियों, शैक्षणिक संस्थानों में प्रवेश, भूमि संरक्षण, स्थानीय उद्यमिता, सरकारी निविदाओं और अन्य नीतिगत क्षेत्रों में मूल निवासियों को विशेष अधिकार और प्राथमिकता देने के साथ ही मूल निवास और स्थायी निवास को अलग-अलग वैधानिक श्रेणियों के रूप में परिभाषित करने और मूल निवासियों के लिए उपयुक्त क्षैतिज आरक्षण लागू करने संबंधी मांग का प्रस्ताव भी रखा।
यूकेडी नेताओं ने दावा किया कि पार्टी का यह एजेंडा उत्तराखंड की विशिष्ट पहचान, प्राकृतिक संसाधनों और स्थानीय लोगों के अधिकारों की रक्षा के साथ संतुलित व समतामूलक विकास का रोडमैप प्रस्तुत करता है।
मौके पर पूर्व केंद्रीय अध्यक्ष नारायण सिंह जंतवाल, शक्ति शैल कपरुवाण, सुरेंद्र सिंह नेगी, पंकज व्यास, जयप्रकाश उपाध्याय, लताफ़त हुसैन, बहादुर सिंह रावत, विजय बौड़ाई, मीनाक्षी घिल्डियाल आदि मौजूद रहे।



