Politics: … तो कर्णप्रयाग सीट पर है ‘मनीष खंडूरी’ नजर

Uttarakhand Politics : गोपेश्वर, 12 अगस्त। लगता है कि पूर्व मुख्यमंत्री दिवंगत भुवनचंद्र खंडूरी के बेटे मनीष खंडूरी कर्णप्रयाग विधानसभा सीट से चुनाव मैदान में उतरने के लिए जोरदार प्रयासों में जुट गए हैं। इसके चलते उन्होंने कर्णप्रयाग में ही डटकर काफी सक्रियता बढ़ा दी है।
दरअसल 2019 में कांग्रेस के टिकट पर गढ़वाल संसदीय क्षेत्र से चुनाव लड़े मनीष खंडूरी को सफलता नहीं मिली थी। इसके बाद वह काफी दिनों तक कांग्रेस से ही जुडे रहे। वर्ष 2024 में मनीष यकायक भाजपा में शामिल हो गए। हालांकि वह राजनीतिक रूप से भाजपा में इस बीच सक्रिय तो नहीं रहे किंतु पिता पूर्व सीएम भुवनचंद्र खंडूरी देहवासन के पश्चात वह यकायक सियासत में सक्रिय हो गए हैं।
पिछले माह उन्होंने देहरादून से लेकर गोपेश्वर तक अपने दिवंगत पिता की अस्थि कलश यात्रा निकाली। इस यात्रा के जरिए उन्होंने अपने भविष्य के इरादे जता दिए थे। इसी दौर में कर्णप्रयाग में आयोजित अस्थि कलश यात्रा में उनके पिता के तमाम अनुयायी शामिल हुए और उन्होने दिवंगत बीसी खंडूरी को भावपूर्ण श्रद्धाजंलि अर्पित की।
इस बीच अब जबकि भाजपा ने जगह-जगह तिरंगा यात्रा का आयोजन किया है तो मनीष खंडूरी कर्णप्रयाग पहुंचकर इस यात्रा में शामिल हो गए। एक तरह से उन्होंने कर्णप्रयाग विधानसभा सीट से चुनावी समर में कूदने का संकेत दे दिया है।
कर्णप्रयाग विधानसभा सीट पर 2012 को छोड़कर हर बार भाजपा ही जीत का परचंम लहराती रही है। 2002 से 2012 तक इस सीट का प्रतिनिधित्व अनिल नौटियाल ने किया। 2012 में टिकट न मिलने पर नौटियाल ने निर्दलीय तौर पर चुनाव लड़ा और वह पराजित हो गए। 2017 के चुनाव में भाजपा ने गैरसैण के पूर्व प्रमुख सुरेंद्र सिंह नेगी पर दांव खेला। नेगी भाजपा के टिकट चुनाव जीतने में सफल रहे। इसी बीच उनका स्वास्थ्य गडबडाने लगा। इसलिए उन्होंने 2022 के चुनाव में दावेदारी पेश नहीं की।
करीब 10 साल तक राजनीति के अज्ञातवास में रहे अनिल नौटियाल पर ही भाजपा ने फिर दांव खेला। इस चुनाव में अनिल नौटियाल तीसरी बार चुनाव जीतने में सफल रहे। हालांकि देवाल के रमेश गडिया 2022 के चुनाव में कर्णप्रयाग सीट से दावेदारी कर रहे थे किंतु भाजपा ने उनकी दावेदारी को तबज्जो नहीं दी। वह अब भी इस सीट के लिए दावेदारी कर रहे हैं। इसी तरह भाजपा के ही राष्ट्रीय मीडिया में शामिल सतीश लखेडा भी लगातार दावेदारी कर रहे हैं।
भाजपा में ही स्थानीय स्तर पर अरुण मैठाणी और टीका प्रसाद मैखुरी भी दावेदारी करते आ रहे हैं। पिछले चुनाव में तो टीका प्रसाद मैखुरी ने निर्दलीय प्रत्याशी के रूप में भाग्य आजमाया था किंतु उन्हें सफलता नहीं मिली। अरुण मैठाणी तो लगातार भाजपा में ही सक्रिय रूप से काम करने के चलते मौजूदा दौर में जिला महामंत्री का दायित्व संभाले हुए है।
एक दौर में गैरसैण के भाजपा के संस्थापकों में से एक रामचंद्र गौड भी लंबे समय से दावेदारी कर रहे हैं। भाजपा ने उन्हें कभी उम्मीदवार तो नहीं बनाया किंतु इस बार गौड को दायित्वधारी का दर्जा दे दिया गया। इस तरह कहा जा सकता है कि कर्णप्रयाग सीट पर मौजूदा दौर में दावेदारी को लेकर घमासान छिडा हुआ है।
मनीष खंडूरी की यकायक सक्रियता को इसी रूप में देखा जा रहा है। वैसे स्थानीय स्तर पर भाजपाई पैराशूट दावेदारों का विरोध करते रहे हैं। अबकि बार कर्णप्रयाग की सियासत दावेदारी को लेकर क्या गुल खिलाती है इस पर राजनीतिक प्रेक्षकों की नजरें टिकने लगी हैं।
(वरिष्ठ पत्रकार रजपाल बिष्ट का विश्लेषण)



