धर्म कर्मपौड़ी गढ़वाल

खांखरा पहुंची कालीमठ की मां कालीमाई की पदयात्रा

13 को पहुंचेगी देवप्रयाग, गंगा स्नान के बाद होगी वापसी

श्रीनगर (गढ़वाल)। सिद्धपीठ कालीमठ की काली माई की डोली शनिवार को देवप्रयाग संगम स्नान के लिए चल रही पदयात्रा के तहत खांखरा पहुंची। वहां श्रद्धालुओं ने देवडोली की भव्य अर्घ्य समर्पण कर मनौतियां मांगी। देवी ने श्रद्धालुओं को आशीष प्रदान किया। डोली रविवार को श्रीनगर पहुंचेगी।

भगवती कालीमाई कालीमठ वाली की ऐतिहासिक देवरा पद यात्रा सात दिसम्बर 2025 से शुरू हुई थी। यात्रा मार्ग में आने वाले गांवों, कस्बों, शहरों में श्रद्धालु परंपरागत अर्घ्य, वाद्य ध्वनि और भक्तिगीतों के साथ यात्रा का स्वागत कर रहे हैं। बदरीनाथ केदारनाथ मंदिर समिति, ऊखीमठ के मार्गदर्शन में कालीमाई पंचगांई समिति, कालीमठ द्वारा आयोजित इस यात्रा ने कालीमठ, कविल्ठा, कोटमा, खोनू, चिल्लोंड, जाल मल्ला, चौमासी, जाल तल्ला, रूच्छ महादेव, स्यांसूगढ़, ब्यूंखी, कुणजेठी व बेडुला गांवों के घर-घर में जाकर माता के दर्शन दिए।

उसके बाद मनसूना, गैड गडगू, चुन्नी, मंगोली, ओंकारेश्वर मंदिर ऊखीमठ होते हुए चन्द्रापुरी, अगस्त्यमुनि, तिलवाड़ा रुद्रप्रयाग होते हुए यात्रा शनिवार को रात्रि प्रवास के लिए खांखरा पहुंची। पदयात्रा रविवार को धारीदेवी होते हुए श्रीकोट श्रीनगर पहुंचेगी। मार्ग में स्थान स्थान पर श्रद्धालु जौ, तिल, चावल, अन्न, मौसमी फल और पारंपरिक वाद्यों की धुनों के साथ माता की आराधना कर रहे हैं।

कालीमाई पंचगांई समिति कालीमठ के अध्यक्ष लखपत सिंह राणा ने यात्रा की सफलता पर प्रसन्नता व्यक्त करते हुए श्रद्धालुओं का आह्वान किया कि “यह दिव्य यात्रा केवल कालीमठ या पंचगांई तक सीमित नहीं है, बल्कि समस्त देवभूमि के भक्तों की आस्था का प्रतीक है।

महामंत्री सुरेशानंद गौड़ ने कहा कि इस पदयात्रा ने न केवल आध्यात्मिक एकता को मजबूत किया है, बल्कि ग्रामीण अंचलों में सामुदायिक संवाद का मार्ग भी प्रशस्त किया है। यात्रा में अनेक हक हकूक धारी तथा भक्तजन प्रतिभाग कर रहे हैं।

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