संस्कृति

Rishikesh: घरों की देहरियों पर सजे ‘फूलदेई’ के फूल

ऋषिकेश 14 मार्च 2024। तीर्थनगरी में जहां देशभर के पर्व त्योहारों को सामूहिक रूप से मनाने की परंपरा है, वहीं पहाड़ी संस्कृति के पर्वों को भी गौरव भाव के साथ मनाया जाने लगा है। कई लोग इस अलख को जगाने के लिए शिद्दत से जुटे हैं। फूलदेई (फूल संक्रांति पर्व) पर इसकी एक झलक देखने को मिली।

गुरुवार को उत्तराखंड के सुदूरवर्ती पहाड़ी क्षेत्र के साथ साथ ही ऋषिकेश में भी बाल पर्व फूलदेई पर कई जगह उत्साह नजर आया। अंतरराष्ट्रीय गढ़वाल महासभा के संस्थापक अध्यक्ष डॉ राजे सिंह नेगी ने उग्रसेन नगर स्थित सोसायटी में बच्चों के साथ लोकपर्व फूलदेई को धूमधाम से मनाया।

ड़ॉ नेगी ने बताया कि कुमाऊं और गढ़वाल के ज्यादातर इलाकों में आठ से नौ दिन तक यह त्यौहार मनाया जाता है। कुछ इलाकों में एक माह तक भी यह फूल संग्रांद मनाने की परंपरा है। यह पर्व हमारी दिनचर्या, ऋतुओं और उसके वैज्ञानिक पक्ष से जुड़ा है। इसके तहत बच्चे हर दिन अपने और अन्य घरों की दहलीज पर फूल चढ़ाते हैं, इसे शुभ शगुन माना जाता है। इसके बदलें में उन्हें उपहार दिए जाते हैं।


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