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Uttarakhand: आपसी खूनी संघर्ष में दूसरे ‘हाथी’ की भी मौत

राजाजी पार्क प्रशासन की कार्यप्रणाली पर सवाल, समय क्यों नहीं खोजा दूसरा घायल हाथी

Rajaji Tiger Reserve Park: रायवाला (चित्रवीर क्षेत्री की रिपोर्ट) । राजाजी टाइगर रिजर्व पार्क की मोतीचूर रेंज में बीते दिनों दो हाथियों के बीच के आपसी खूनी संघर्ष में घायल दूसरे हाथी की भी मौत हो गई है। हाथी का मृत शव सौंग नदी में पड़ा मिला। पार्क के अधिकारियों और चिकित्सकों ने पोस्टमार्टम और अन्य कार्यवाही शुरू कर दी है। पार्क के अधिकारियों ने इसबात की पुष्टि नहीं की कि यह आपसी संघर्ष में घायल दूसरा हाथी है।

जानकारी के मुताबिक राजाजी टाइगर रिजर्व पार्क से सटी ग्राम पंचायत साहबनगर के ग्रामीणों ने एक हाथी के सौंग नदी में पड़े होने की सूचना मोतीचूर रेंज को दी। जिसके बाद रेंज अधिकारी महेंद्र गिरी गोस्वामी मयफोर्स मौके पर पहुंचे। उन्होंने इसकी जानकारी उच्चाधिकारियों को दी। जिसके बाद राजाजी पार्क के वन्यजीव प्रतिपलक एलपी टम्टा की निगरानी में मृत हाथी के शव को क्रेन के जरिए नदी से बाहर निकाला गया।

रेंज अधिकारी ने बताया कि पार्क के चिकित्सक डॉ. राकेश नौटियाल और डॉ. ध्यानी के साथ पैनल ने हाथी का पोस्टमार्टम किया जा रहा है। रेंजर महेंद्र गिरी ने बताया कि मृत हाथी संभवतः 17 फ़रवरी को रेंज के गूलर पड़ाव बीट में आपसी संघर्ष में घायल दूसरा हाथी है। उसके शरीर पर घावों के निशान दिख रहे हैं।

बता दें कि 17 फरवरी की रात में रेंज के गूलर पड़ाव बीट में दो टस्कर हाथियों के बीच खूनी संघर्ष हुआ था। जिसमें एक 55 वर्षीय नर हाथी की मौके पर ही मौत हो गई थी। यह मृत हाथी उसी संघर्ष में घायल बताया जा रहा है। जिसकी उम्र 35 से 35 वर्ष के बीच है। हालांकि पार्क प्रशासन ने इस बात की अभी पुष्टि नहीं की कि यह उसमें से दूसरा हाथी है।

वन्यजीव प्रतिपालक एलपी टम्टा ने बताया कि पोस्टमार्टम के बाद हाथी के शव को पार्क क्षेत्र में ही दफनाया जाएगा। मौके पर उप वन क्षेत्राधिकारी जेपी अंथवाल, एसपी जखमोला, रविन्द्र बहुगुणा, वन दरोगा मनोज चौहान, बीट अधिकारी नरेन्द्र सिंह गुसाईं, विक्रम सिंह पुंडीर, सुरेंद्र जोशी आदि मौजूद हैं।

पार्क प्रशासन की कार्यप्रणाली पर सवाल
दो दिन पहले पार्क क्षेत्र में दो हाथियों के बीच संघर्ष के चलते एक की मौत सामने आई थी। आज दूसरा हाथी भी मरा हुआ पाया गया। लेकिन इसबीच पार्क प्रशासन ने दूसरे हाथी को खोजने में देर कर दी। जिससे कि पार्क प्रशासन की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े हो रहे हैं। यदि पार्क प्रशासन समय रहते दूसरे घायल हाथी को खोज कर उसका उपचार करता, पार्क को महज तीन दिनों में दो हाथियों को नहीं खोना पड़ता। कम से कम एक की जान तो बचाई ही जा सकती थी।

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