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Rishikesh Assembly: … तो ‘विरोध’ के बावजूद ऐसे मिला ‘प्रेमचंद’ को ‘टिकट’

Uttarakhand Assembly Election 2022: ऋषिकेश विधानसभा सीट पर भारतीय जनता पार्टी ने चौथी बार प्रेमचंद अग्रवाल पर अपना भरोसा जताया है। ऐसे में उनके विरोधियों को हाईकमान का यह फैसला निश्रिचत ही पसंद नहीं आया होगा। उनके जेहन में अब ये सवाल भी होगा, कि अग्रवाल चौथी बार भी हाईकमान की पसंद कैसे बने? और उनकी खुद की दावेदारी में कहां कमी रह गई?

दरअसल, भाजपा ने टिकट फाइनल करने से पहले प्रतिनिधियों को भेजकर विधानसभावार कार्यकर्ताओं और पदाधिकारियों से रायशुमारी की। ऋषिकेश में रायशुमारी के दिन हंगामा भी बरपा। बावजूद इसके पार्टी को प्रेमचंद अग्रवाल ही विनिंग कैडिडेट लगे। वैसे आम लोगों में पहले से यह चर्चा थी, कि भाजपा 2022 में भी अग्रवाल पर ही दांव खेलेगी।

जानकार बताते हैं कि अपने दावों की मजबूती के लिए स्थानीय स्तर पर पार्टी में अग्रवाल के खिलाफ अंदरखाने खूब खिचड़ी पकती रही, लेकिन उनकी खिचड़ी हाईकमान को नहीं भायी। सो, अब यह भी चर्चा है कि विरोधियों से कहां चूक हुई, और अग्रवाल ने किस तरह से बाजी अपने पक्ष में की?

स्थानीय राजनीति के जानकार कहते हैं कि अग्रवाल का विरोध नया नहीं है। 2012 और 2017 के विधानसभा चुनावों में भी अंतकर्लह था। तब भी उन्होंने पहले टिकट और फिर जीत की बाजी मारी। यही सियासी हालात उनके विरोधियों को अपने राजनीति भविष्य के लिए खतरा लग रहे हैं।

बताते हैं, कि प्रेमचंद अग्रवाल काफी पहले अपने खिलाफ चल रही रणनीतियों के असर को भांप चुके थे। तभी से उन्होंने इससे पार पाने की तैयारियां शुरू कर दी थी। जानकार कहते हैं कि अग्रवाल जैसे विकास के अपने दावे में क्षेत्र में सड़कों का जाल बिछाने की बात कहते हैं, कुछ ऐसे ही उन्होंने पार्टी संगठन में भी मौके का लाभ लेते हुए अपना जाल बिछाया।

बताते हैं कि जैसे-जैसे मौके आए उन्होंने बेहद चातुर्य के साथ पार्टी के प्रदेश, जिला, मंडल, मोर्चों, शक्ति केंद्रों आदि में स्थानीय स्तर पर अपने करीबियों को शामिल किया। जब टिकट का वक्त आया, तो जमीन पकड़ के साथ रायशुमारी में इन्हीं पार्टी वर्क्स की वोटिंग से उनकी दावेदारी प्लस-प्लस मिल गया। अब उनके कंधों पर पार्टी के भरोसे को कायम रखने की जिम्मेदारी है, जिसपर उन्होंने अपनी चौथी जीत का दावा किया है।

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