देहरादून

उत्तराखंडः UCC लागू होना ऐतिहासिक उपलब्धिः सीएम

यूसीसी से सामाजिक न्याय, महिला सशक्तिकरण और सुशासन को मिली नई दिशा

समान नागरिक संहिता दिवस पर प्रदर्शनी का अवलोकन करते सीएम धामी-Shikhar Himalaya News

देहरादून। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा कि उत्तराखंड में यूसीसी का लागू होना राज्य के इतिहास का स्वर्णिम अध्याय है। इस कानून से सामाजिक न्याय, समानता और संवैधानिक मूल्यों को मजबूत आधार मिला है।

मंगलवार को गढ़ी कैंट स्थित हिमालयन कल्चरल सेंटर, में राज्य का पहला समान नागरिक संहिता दिवस कार्यक्रम आयोजित किया गया। मुख्यमंत्री ने कहा कि संविधान निर्माता डॉ. भीमराव आंबेडकर सहित सभी महापुरुषों ने अनुच्छेद 44 के अंतर्गत समान नागरिक संहिता की परिकल्पना की थी। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के मार्गदर्शन में वर्ष 2022 के विधानसभा चुनाव से पूर्व राज्य में यूसीसी लागू करने का संकल्प लिया गया, जिसे देवभूमि की जनता ने अपना आशीर्वाद दिया।

उन्होंने कहा कि राज्य की सत्ता संभालते ही इस दिशा में कार्य शुरू किया गया और 7 फरवरी 2024 को यूसीसी विधेयक विधानसभा से पारित कर राष्ट्रपति को भेजा गया। 11 मार्च 2024 को स्वीकृति मिलने के बाद सभी प्रक्रियाएं पूरी कर 27 जनवरी 2025 से यूसीसी को विधिवत लागू कर दिया गया।

मुख्यमंत्री ने कहा कि अलग-अलग व्यक्तिगत कानूनों के कारण समाज में असमानता और भेदभाव की स्थिति बनी हुई थी। यूसीसी लागू होने से सभी नागरिकों को समान अधिकार मिले हैं और महिला सशक्तिकरण के नए युग की शुरुआत हुई है। कहा कि मुस्लिम महिलाओं को हलाला, तीन तलाक, बहुविवाह और बाल विवाह जैसी कुप्रथाओं से मुक्ति मिली है। यूसीसी लागू होने के बाद राज्य में हलाला या बहुविवाह का कोई मामला सामने नहीं आया है।

मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया कि यूसीसी किसी धर्म के खिलाफ नहीं, बल्कि कुप्रथाओं को समाप्त कर “समानता से समरसता” स्थापित करने का कानूनी प्रयास है। विवाह, तलाक, उत्तराधिकार, संपत्ति विभाजन और बाल अधिकारों से जुड़े नियम सभी धर्मों के लिए समान किए गए हैं, जिससे पारिवारिक विवादों में कमी आएगी।

उन्होंने बताया कि युवाओं की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए लिव-इन रिलेशनशिप के लिए पंजीकरण अनिवार्य किया गया है। लिव-इन से जन्मे बच्चों को जैविक संतान के समान अधिकार दिए गए हैं। यूसीसी से सरकारी सेवाएं अधिक सरल और पारदर्शी हुई हैं। जहां पहले प्रतिदिन औसतन 67 विवाह पंजीकरण होते थे, अब यह संख्या 1400 से अधिक हो गई है। एक वर्ष में लगभग 5 लाख आवेदन प्राप्त हुए, जिनमें से 95 प्रतिशत से अधिक का निस्तारण किया जा चुका है।

मुख्यमंत्री ने बताया कि हाल ही में यूसीसी में संशोधन संबंधी विधेयक को राज्यपाल की स्वीकृति मिली है, जिसके तहत विवाह के समय पहचान छिपाने या गलत तथ्य देने पर विवाह निरस्त किया जा सकेगा तथा धोखाधड़ी और दबाव जैसे मामलों में सख्त दंड का प्रावधान किया गया है।

उन्होंने अमेरिका स्थित एक एनजीओ द्वारा लगाए गए हेट स्पीच के आरोपों पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि यदि धर्मांतरण और अतिक्रमण के खिलाफ बोलना हेट स्पीच है, तो वह इसे स्वीकार करते हैं।

इस अवसर पर यूसीसी निर्माण समिति के सदस्यों, इसके सफल क्रियान्वयन से जुड़े प्रशासनिक अधिकारियों तथा पंजीकरण में योगदान देने वाले वीएलसी को सम्मानित किया गया। इस अवसर पर मुख्यमंत्री ने यूसीसी आधारित फोटो प्रदर्शनी का भी अवलोकन किया।

मौके पर कैबिनेट मंत्री गणेश जोशी, डॉ धन सिंह रावत, सांसद नरेश बंसल, विधायक खजान दास, सविता कपूर, सुरेश गड़िया, बृजभूषण गैरोला, सचिव गृह शैलेश बगौली, डीजीपी दीपम सेठ, यूसीसी समिति सदस्य पूर्व मुख्य सचिव शत्रुघ्न सिंह, दून विवि की वीसी प्रो. सुरेखा डंगवाल, मनु गौड़, अजय मिश्रा, विशेष सचिव गृह निवेदिता कुकरेती आदि मौजूद रहे।

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