Uttarakhand: धामी कैबिनेट ने लगाई कई अहम प्रस्तावों पर मुहर

देहरादून। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी की अध्यक्षता में बुधवार को राज्य मंत्रिमंडल की बैठक संपन्न हुई। बैठक में कई अहम प्रस्तावों पर चर्चा के बाद उन्हें मंजूरी दी गई। कैबिनेट के निर्णयों में ड्रग फ्री अभियान को मजबूती देने, दैनिक वेतनभोगी श्रमिकों को न्यूनतम वेतनमान प्रदान करने और ईएसआई चिकित्सा सेवा संवर्ग के पुनर्गठन जैसे महत्वपूर्ण फैसले शामिल हैं।
ड्रग फ्री मुहिम को मिलेगी रफ्तार
राज्य में नशामुक्ति अभियान को और प्रभावी बनाने के लिए एंटी नारकोटिक्स टास्क फोर्स (एएनटीएफ) का स्वतंत्र ढांचा विकसित किया जाएगा। वर्ष 2022 में गठित इस टास्क फोर्स में अब तक पुलिस बल से प्रतिनियुक्ति पर कार्मिक तैनात किए जाते थे। अब राज्य मुख्यालय स्तर पर पहली बार 22 पदों का सृजन किया गया है। इनमें एक पुलिस उपाधीक्षक, दो ड्रग निरीक्षक, एक निरीक्षक, दो उपनिरीक्षक, चार मुख्य आरक्षी, आठ आरक्षी और दो आरक्षी चालक शामिल हैं।
वन विभाग के 589 दैनिक श्रमिकों को न्यूनतम वेतन
कैबिनेट ने वन विभाग में कार्यरत दैनिक वेतनभोगी कर्मचारियों को न्यूनतम वेतनमान देने का निर्णय लिया है। मंत्रिमंडलीय उप-समिति की संस्तुति के आधार पर 589 कर्मचारियों को न्यूनतम 18 हजार रुपये प्रतिमाह वेतन दिया जाएगा। वन विभाग और वन विकास निगम में कुल 893 दैनिक श्रमिक कार्यरत हैं, जिनमें से 304 को पहले से ही न्यूनतम वेतनमान का लाभ मिल रहा है।
ईएसआई चिकित्सा सेवा संवर्ग का पुनर्गठन
राज्य मंत्रिमंडल ने “उत्तराखण्ड कर्मचारी राज्य बीमा योजना, श्रम चिकित्सा सेवा नियमावली, 2026” को प्रख्यापित करने का निर्णय लिया है। इसके तहत कुल 94 पद सृजित होंगे, जिनमें 76 चिकित्सा अधिकारी, 11 सहायक निदेशक, छह संयुक्त निदेशक और एक अपर निदेशक शामिल हैं। इससे पूर्व ईएसआई ढांचे में केवल एक मुख्य चिकित्सा अधिकारी (CMO) और 13 चिकित्सा अधिकारी के पद थे।
सूक्ष्म खाद्य उद्यम योजना की अवधि बढ़ी
प्रधानमंत्री सूक्ष्म खाद्य उद्यम उन्नयन योजना की अवधि केंद्र सरकार द्वारा 31 मार्च 2026 तक बढ़ाए जाने के अनुरूप राज्य सरकार ने भी मुख्यमंत्री सूक्ष्म खाद्य उद्यम उन्नयन योजना की अवधि वित्तीय वर्ष 2025-26 तक बढ़ाने का निर्णय लिया है। साथ ही, भविष्य में केंद्र स्तर पर अवधि विस्तार होने की स्थिति में राज्य में भी इसे स्वतः विस्तारित माना जाएगा।
कारागार अधिनियम संशोधन को मंजूरी
कैबिनेट ने “उत्तराखण्ड कारागार और सुधारात्मक सेवाएं (संशोधन) अधिनियम, 2026” के प्रारूपण को स्वीकृति दी है। सर्वोच्च न्यायालय के निर्देशों के अनुपालन में ‘आदतन अपराधी’ शब्द की परिभाषा को राज्य कानूनों के अनुरूप संशोधित किया जाएगा। संशोधन विधेयक को आगामी विधानसभा सत्र में पुनः प्रस्तुत किया जाएगा।
बोनस संदाय संशोधन विधेयक वापस लेने का निर्णय
कैबिनेट ने बोनस संदाय (उत्तराखण्ड संशोधन) विधेयक, 2020 को यथास्थिति विधानसभा से वापस लेने का निर्णय लिया है। कोविड-19 महामारी के दौरान उद्योगों को राहत देने के उद्देश्य से लाए गए इस विधेयक में न्यूनतम बोनस भुगतान को ‘आवंटनीय अधिशेष’ की उपलब्धता से जोड़ा गया था। केंद्र सरकार के श्रम एवं रोजगार मंत्रालय की असहमति और वर्तमान परिस्थितियों को देखते हुए राज्य सरकार ने विधेयक को आगे न बढ़ाने का फैसला किया है।



