
देहरादून/नोएडा। ऊपरी यमुना नदी बोर्ड की 9वीं रिव्यू कमेटी की बैठक में उत्तराखंड के सिंचाई मंत्री सतपाल महाराज ने राज्य के हिस्से के यमुना जल में वृद्धि की मांग उठाई। उन्होंने कहा कि पर्वतीय क्षेत्रों में सिंचाई की कमी के कारण नकदी फसलों, फल और सब्जियों की उत्पादकता प्रभावित हो रही है, जिससे पलायन भी बढ़ रहा है। ऐसे में राज्य को उसकी वास्तविक जरूरत के अनुसार जल आवंटन किया जाना आवश्यक है।
नोएडा स्थित ऊपरी यमुना नदी बोर्ड भवन में केंद्रीय जल शक्ति मंत्री सीआर. पाटिल की अध्यक्षता में हुई बैठक में जल स्तर, प्रदूषण और जल-बंटवारे से जुड़े महत्वपूर्ण मुद्दों पर चर्चा हुई। महाराज ने बताया कि 12 मई 1994 को यमुना बेसिन राज्यों उत्तर प्रदेश, हिमाचल प्रदेश, हरियाणा, राजस्थान और दिल्ली के बीच जल बंटवारे का समझौता हुआ था। उत्तराखंड के पृथक राज्य बनने के बाद उसे उत्तर प्रदेश के हिस्से से मात्र 0.311 बीसीएम जल दिया गया, जो उसकी मांग से 32 प्रतिशत कम है।
उन्होंने कहा कि लखवाड़ व किशाऊ परियोजनाओं से बनने वाले जलाशयों के दुष्प्रभाव भी उत्तराखंड को झेलने होंगे, इसलिए 1994 के समझौते की समीक्षा कर राज्य को जल उपलब्धता के अनुरूप हिस्सा दिया जाए।
महाराज ने दिल्ली में यमुना प्रदूषण रोकने के लिए हरियाणा से अमोनिया और अन्य प्रदूषक तत्वों के निर्वहन को रोकने और फैक्ट्रियों में उन्नत ट्रीटमेंट तकनीक लागू करने की जरूरत पर भी जोर दिया। बैठक में उत्तर प्रदेश, दिल्ली, हरियाणा और राजस्थान के सिंचाई मंत्री भी मौजूद रहे।



