सरकार को लड़नी चाहिए बापूग्राम की लड़ाईः हरीश रावत
पूर्व सीएम ने संघर्ष समिति को दिया समर्थन, कैबिनेट व विशेष सत्र की मांग

ऋषिकेश। बापूग्राम में घर और जमीन बचाने की लड़ाई को लेकर पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत सोमवार को धरना स्थल पर पहुंचे। उन्होंने बापूग्राम बचाओ संघर्ष समिति को अपना खुला समर्थन दिया। साथ ही कहा कि ऐसे संवेदनशील मुद्दों पर आम जनता को सर्वोच्च न्यायालय में अकेले लड़ने के लिए मजबूर नहीं किया जाना चाहिए, बल्कि सरकार को स्वयं पक्षकार बनकर मजबूती से यह लड़ाई लड़नी चाहिए।
पूर्व मुख्यमंत्री ने कहा कि जनता सरकार इसलिए चुनती है ताकि ऐसे संकट के समय सरकार उनकी ढाल बने। यह केवल प्रशासनिक जिम्मेदारी नहीं, बल्कि सरकार का नैतिक कर्तव्य भी है। इसीबीच उन्होंने मौके से ही मुख्य सचिव से फोन पर वार्ता कर बापूग्राम समस्या का शीघ्र ठोस समाधान निकालने की बात कही। यह संकेत भी दिए कि वह इस विषय पर मुख्यमंत्री से भी सीधे बातचीत करेंगे।
हरीश रावत ने सरकार से मांग की कि कैबिनेट तत्काल बापूग्राम के हित में फैसला ले। यदि कैबिनेट स्तर पर समाधान संभव नहीं है, तो मुख्यमंत्री को विशेष सत्र बुलाकर बापूग्राम के लोगों की संपत्ति बचाने के लिए निर्णय लेना चाहिए। साथ ही सरकार के माध्यम से यह मामला सर्वोच्च न्यायालय में मजबूती से रखा जाए।
धरनास्थल पर बापूग्राम बचाओ संघर्ष समिति के पदाधिकारियों और स्थानीय पार्षदों ने पूर्व मुख्यमंत्री को एक ज्ञापन सौंपा। जिसमें विपक्ष द्वारा इस मसले को विधानसभा और लोकसभा में उठाने और संघर्ष के दौरान स्थानीय लोगों के साथ खड़ा रहने की मांग की गई।
मौके पर पूर्व कबीना मंत्री शूरवीर सजवाण, महानगर अध्यक्ष राकेश सिंह मियां, जयेन्द्र रमोला, राजपाल खरोला, संधर्ष समिति संयोजक रमेश जुगरान, सुनील बहुगुणा, पार्षद सत्य कपरुवान, सचवीर भंडारी, मुस्कान चौधरी, दिनेश रावत, सुरेंद्र नेगी (सूरी), गुरविंदर सिंह गुर्री, अविनाश सेमल्टी, रामप्रसाद उनियाल, राजेन्द्र डोभाल, शिवप्रसाद कंडवाल, दिनेश दत्त शर्मा, सुभाष सैनी, मनोज गुसाईं आदि मौजूद थे।



