ऋषिकेश

गंगा में गिर रहे गंदे पानी पर प्रशासन सख्त

• डीएम ने किया चन्द्रेश्वर नाले का निरीक्षण

• 25 घरों के ड्रेनेज पाइप सीज, एसटीपी क्षमता बढ़ाने के निर्देश

ऋषिकेश। चन्द्रेश्वर नाले से बिना उपचारित गंदे पानी और ठोस कचरे के गंगा नदी में प्रवाहित होने की शिकायतों को गंभीरता से लेते हुए जिलाधिकारी सविन बंसल ने बुधवार को क्षेत्र का स्थलीय निरीक्षण किया। इस दौरान उन्होंने संबंधित विभागों को नाले के उपचार व प्रदूषण रोकथाम के लिए विस्तृत रिपोर्ट समेत ठोस कार्ययोजना तलब की है।

निरीक्षण के समय अधीक्षण अभियंता, सिंचाई विभाग तथा महाप्रबंधक, निर्माण वृत्त (गंगा), उत्तराखंड पेयजल निगम ने जिलाधिकारी को नाले का पूरा नक्शा और प्रस्तावित एक्शन प्लान की जानकारी दी।

गंगा में दूषित जल बहाने वालों पर जीरो टॉलरेंस
जिलाधिकारी ने स्पष्ट कहा कि मुख्यमंत्री के निर्देशों के तहत यह सुनिश्चित किया जाएगा कि किसी भी स्थिति में बिना उपचारित जल गंगा नदी में न जाए। चाहे सरकारी प्रतिष्ठान हों या निजी आवासीय भवन। यदि कोई भी गंदा पानी गंगा में प्रवाहित करता पाया गया, तो कड़ी कार्रवाई की जाएगी। निरीक्षण के दौरान नाले में वेस्ट वाटर छोड़ रहे 25 घरों के पाइप-ड्रेन तत्काल सीज करने के निर्देश दिए गए।

एसटीपी क्षमता बढ़ाने का प्रस्ताव जल्द
डीएम ने सीवर ट्रीटमेंट प्लांट (एसटीपी) की क्षमता बढ़ाने के लिए जल्द प्रस्ताव तैयार करने के निर्देश दिए। कहा कि बिना उपचारित गंदे पानी की रोकथाम प्रशासन की शीर्ष प्राथमिकता है। उन्होंने कहा कि गंगा की स्वच्छता एवं पवित्रता बनाए रखने के लिए एक व्यापक कार्ययोजना तैयार कर शासन को भेजी जाएगी।

सीवरेज नेटवर्क से जोड़ने के निर्देश
जिलाधिकारी ने बताया कि नगर क्षेत्र के अधिकांश हिस्सों में सीवरेज नेटवर्क मौजूद है, लेकिन जहां कार्य प्रगति पर है या कनेक्शन नहीं जुड़े हैं, वहां प्राथमिकता के आधार पर कार्य किया जाएगा। चेतावनी दी कि इंटरसेप्शन व ड्रेनेज प्लान के तहत एसटीपी विस्तार की योजना बनाई जा रही है। नियमों का उल्लंघन करने वालों के खिलाफ सख्त प्रवर्तन कार्रवाई होगी। डीएम ने वार्ड-3 में गली-मोहल्लों में पैदल भ्रमण कर आवासीय भवनों और प्रतिष्ठानों की सीवरेज व्यवस्था का जायजा लिया और नालियों को सीवर लाइन से जोड़ने के निर्देश दिए।

विभागों को रिपोर्ट बनाने के निर्देश
जिलाधिकारी ने नगर निगम, उपजिलाधिकारी, सीवरेज अनुरक्षण इकाई, पेयजल निगम, जल संस्थान एवं प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड को आपसी समन्वय से विस्तृत रिपोर्ट तैयार करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि रिपोर्ट आने के बाद इसे जनता के साथ साझा किया जाएगा।

7.50 एमएलडी एसटीपी से हो रहा तीन नालों का उपचार
सीवरेज अनुरक्षण इकाई ने बताया कि ऋषिकेश में 7.50 एमएलडी क्षमता का सीवर ट्रीटमेंट प्लांट नमामि गंगे कार्यक्रम के तहत ढालवाला-मुनिकीरेती योजना में बनाया गया है। सीमित भूमि के कारण यह देश का पहला बहुमंजिला एसटीपी है, जो अक्टूबर 2020 से संचालित है। यह एसटीपी श्मशान घाट नाला, चन्द्रेश्वर नगर नाला और ढालवाला नाले के शोधन के लिए बनाया गया है। मानसून के दौरान ढालवाला नाले में जल प्रवाह क्षमता से अधिक हो जाता है, जबकि अन्य दो नालों का संपूर्ण सीवेज एसटीपी में उपचारित किया जाता है।

ड्रोन सर्वे में 502 परिवार चिन्हित
मानसून के दौरान ढालवाला नाले में भूमिगत जल की मात्रा अधिक रहने से प्रदूषण स्तर कम पाया जाता है। नाले के दोनों ओर ड्रोन सर्वे और घर-घर सर्वे किया जा रहा है, जिसमें अब तक 502 परिवार चिन्हित किए गए हैं। इनमें से 38 परिवारों का सीवर सीधे नाले में और 84 परिवारों का ग्रे-वाटर नाले में जा रहा है। जल नमूनों की जांच एनएबीएल प्रमाणित प्रयोगशाला से कराई जा रही है।

निरीक्षण के दौरान उपजिलाधिकारी ऋषिकेश योगेश मेहरा, नगर आयुक्त राम कुमार बिनवाल, सीओ पुलिस पूर्णिमा गर्ग समेत जल निगम, जल संस्थान, सिंचाई विभाग और अन्य अधिकारी मौजूद रहे।

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back to top button
error: Content is protected !!