Rishikesh: आशियाने बचाने को मुखर आंदोलन का ऐलान
• बापूग्राम क्षेत्र के लोग दो फरवरी को निकालेंगे महारैली

• प्रधानमंत्री और राष्ट्रपति को एसडीएम के जरिए भेजेंगे ज्ञापन
ऋषिकेश। सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर वन विभाग के सर्वे के बाद अपने घर और जमीनों पर मंडराते खतरे के खिलाफ बापूग्राम और आसपास के वाशिंदें सड़कों पर उतरने को तैयार हैं। दो फरवरी को हजारों लोग आईडीपीएल से तहसील तक महारैली निकाल कर अपना विरोध दर्ज करेंगे।
शनिवार को मालवीय नगर स्थित एक होटल में बापूग्राम संघर्ष समिति के सह संयोजक रविंद्र सिंह राणा ने मीडिया को यह जानकारी दी। कहा कि प्रभावित क्षेत्रों कई दशकों से बापूग्राम, बीसबीघा, मीरानगर, शिवाजीनगर, मालवीय नगर, अमित ग्राम, दुधुपानी, मनसा देवी, बैराज और वीरभद्र में बसे परिवारों को अपने आशियाने उजड़ने का डर सता रहा है। सभी लोग पिछले 20 दिनों से आंदोलनरत हैं। अब इस आंदोलन को और मुखर किया जाएगा।
उन्होंने बताया कि दो फरवरी को बापूग्राम बचाओ संघर्ष समिति के बैनर पर आईडीपीएल से तहसील तक महारैली निकाली जाएगी। जिसके बाद एसडीएम को प्रधानमंत्री और राष्ट्रपति के नाम ज्ञापन सौंपा जाएगा।
समिति से जुड़े ज्योति सजवाण ने बताया कि वर्ष 1950 से यह क्षेत्र पंचायतों के अधीन रहा है, 2018 में नगर निगम में शामिल किया गया। सरकार ने यहां बिजली, पानी, सड़क जैसी बुनियादी सुविधाएं उपलब्ध कराईं, जिससे यह साबित होता है कि यह आबादी वाला क्षेत्र है। क्षेत्रवासियों की मांग है कि इन क्षेत्रों को राजस्व ग्राम घोषित किया जाए।
पार्षद सत्या कपरुवान ने सरकार की ओर से सुप्रीम कोर्ट में पेश किए जा रहे तथ्यों पर सवाल उठाए। कहा कि सरकारी वकील की जानकारियां जमीनी हकीकत से अलग है। वर्तमान में यहां करीब 15 हजार परिवार रहते हैं, जिनकी अनुमानित आबादी लगभग 70 हजार है। ऐसे में किसी भी तरह की कार्रवाई व्यापक जनजीवन को प्रभावित करेगी।
मौके पर संघर्ष समिति के संयोजक रमेश जुगलान, पार्षद मुस्कान, रामकुमार कश्यप आदि मौजूद रहे।



