पौड़ी गढ़वालब्लॉगिंग

‘साधना’ ने लिखी आत्मनिर्भरता की नई कहानी

सफलता की कहानी : पौड़ी। उत्तराखंड सरकार की महिला सशक्तिकरण और स्वरोजगार को बढ़ावा देने वाली नीतियां अब केवल कागजों तक सीमित नहीं हैं, बल्कि पहाड़ के गांवों में जमीनी बदलाव की मिसाल बन रही हैं। सीएम पुष्कर सिंह धामी की पहल का असर विकासखंड पौड़ी के ग्राम थल्ली में भी दिख रहा है। जहां साधना रावत ने मेहनत, हौसले और सही मार्गदर्शन के सहारे आत्मनिर्भरता की नई इबारत लिखी है।

कभी मजदूरी और खेती पर निर्भर रहने वाली साधना रावत आज अपने गांव में एक सफल महिला उद्यमी के रूप में पहचानी जाती हैं। यह बदलाव ग्रामोत्थान परियोजना और राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन (एनआरएलएम) से जुड़ने के बाद संभव हुआ।

सपनों को मिली दिशा
ग्राम पंचायत थल्ली में ग्रामोत्थान परियोजना के तहत इन्टरप्राइज गतिविधियों के लिए किए गए सर्वे के दौरान साधना रावत का चयन रिटेल शॉप के लिए किया गया। मानकों पर खरा उतरने के बाद भौतिक सत्यापन हुआ और उन्हें परियोजना के अंतर्गत कुल एक लाख रुपये की गतिविधि लागत में से 30 हजार रुपये की सहयोग राशि प्रदान की गई। इसके अलावा सहकारी समिति से 50 हजार रुपये का ब्याज रहित ऋण और सीआईएफ से 50 हजार रुपये का अतिरिक्त ऋण लेकर साधना ने गांव में अपनी रिटेल दुकान की शुरुआत की। यही दुकान आज उनके परिवार की आर्थिक रीढ़ बन चुकी है।

गांव को भी मिली सुविधा
जहां पहले आय का कोई स्थायी साधन नहीं था, वहीं आज साधना की दुकान से प्रतिमाह 70 से 80 हजार रुपये का कारोबार हो रहा है। उनकी दैनिक बिक्री 7 से 9 हजार रुपये तक पहुंच चुकी है, जबकि शुद्ध वार्षिक लाभ करीब 80 हजार रुपये बताया जा रहा है। गांव में रोजमर्रा का सामान उपलब्ध होने से आसपास के ग्रामीणों को भी राहत मिली है। अब उन्हें छोटी-छोटी जरूरतों के लिए दूर नहीं जाना पड़ता। इससे न केवल साधना का व्यवसाय बढ़ा है, बल्कि गांव की सुविधा भी बेहतर हुई है।

आत्मविश्वास बना ताकत
ग्रामोत्थान परियोजना, एनआरएलएम और सीएलएफ के माध्यम से समय-समय पर साधना को बैठकों, योजनाओं की जानकारी और आजीविका संवर्द्धन से जुड़े प्रशिक्षण प्रदान किए जा रहे हैं। परियोजना स्टाफ द्वारा उनके कार्य का नियमित मूल्यांकन और मार्गदर्शन भी किया जा रहा है, जिससे उनका आत्मविश्वास लगातार मजबूत हुआ है।

साधना रावत बोली-
पहले घर चलाना बहुत मुश्किल होता था और हमें सरकारी योजनाओं की कोई जानकारी नहीं थी। ग्रामोत्थान परियोजना और एनआरएलएम से जुड़ने के बाद मुझे सहयोग मिला और आज मैं अपनी दुकान चला पा रही हूं। अब परिवार की जरूरतें आसानी से पूरी हो जाती हैं। उन्होंने अपनी सफलता का श्रेय ग्रामोत्थान परियोजना, एनआरएलएम और उमंग सीएलएफ को दिया। कहा कि उनका अगला लक्ष्य दुकान को और बड़ा करना है।

अधिकारी बोले-
ग्रामोत्थान परियोजना प्रबंधक कुलदीप बिष्ट ने कहा कि परियोजना का उद्देश्य ग्रामीण महिलाओं को स्वरोजगार से जोड़कर आर्थिक रूप से सशक्त बनाना है। साधना रावत की सफलता यह साबित करती है कि सही मार्गदर्शन और वित्तीय सहयोग मिलने पर महिलाएं गांव में रहकर भी सफल उद्यम खड़ा कर सकती हैं। उन्होंने बताया कि परियोजना के माध्यम से भविष्य में और अधिक महिलाओं को उद्यम गतिविधियों से जोड़ने के प्रयास लगातार जारी रहेंगे।

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