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Pauri: चीड़ आधारित रोजगार पर कार्यशाला में हुई चर्चा

लीसा विदोहन, एग्रो फॉरेस्ट्री व वनाग्नि रोकथाम पर आए विशेषज्ञों के सुझाव

पौड़ी। वन विभाग की ओर से मध्य हिमालयी क्षेत्र में चीड़ आधारित रोजगार की संभावनाओं पर कार्यशाला आयोजित की गई। कार्यशाला में लीसा विदोहन से रोजगार सृजन, ‘चीड़ एक कल्पवृक्ष’ की अवधारणा, चीड़ के सामाजिक, आर्थिक व सांस्कृतिक महत्व और एग्रो फॉरेस्ट्री की संभावनाओं व चुनौतियों पर चर्चा की गई।

मंगलवार को प्रेक्षागृह में आयोजित कार्यशाला का शुभारंभ जिला पंचायत अध्यक्ष रचना बुटोला ने किया। कहा कि मध्य हिमालयी क्षेत्र में चीड़ स्थानीय आजीविका से जुड़ा महत्वपूर्ण संसाधन है। वैज्ञानिक प्रबंधन और चीड़ आधारित गतिविधियों को बढ़ावा देकर ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार के नए अवसर सृजित किए जा सकते हैं। उन्होंने महिला समूहों और युवाओं की सहभागिता को आवश्यक बताया।

डीएफओ गढ़वाल महातिम यादव ने कहा कि लीसा विदोहन से स्थानीय लोगों को रोजगार मिलेगा और वैज्ञानिक पद्धति से संचालन से ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती मिलेगी। उन्होंने पिरुल संग्रहण को वनाग्नि रोकथाम में सहायक बताया।

कार्यक्रम में कलाकारों व छात्र-छात्राओं ने सांस्कृतिक प्रस्तुतियों से वन संरक्षण और जन-जागरूकता का संदेश दिया। मौके पर ब्लॉक प्रमुख पोखड़ा संजय गुसाईं, कनिष्ठ प्रमुख संजय जोशी, जिपंस डोभ अनुज कुमार, पोखड़ा बलवंत सिंह नेगी, कालों भारत सिंह रावत, एसडीओ आयशा बिष्ट, एसडीओ सिविल एवं सोयम लक्की शाह, प्रशिक्षु आईएफएस विनीत कुमार, रेंजर पौड़ी लव शाह, डॉ. कुलवंत शर्मा आदि मौजूद रहे।

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