पेड़ लगाना ही सिर्फ वन संरक्षण नहींः भूपेंद्र यादव
देहरादून में अंतर्राष्ट्रीय वन दिवस पर राष्ट्रीय कार्यशाला आयोजित

देहरादून। केंद्रीय पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्री भूपेंद्र यादव ने कहा कि वन संरक्षण का अर्थ केवल पेड़ लगाना नहीं, बल्कि पूरे पारिस्थितिकी तंत्र का संरक्षण करना है। उन्होंने वानिकी के प्रति समग्र दृष्टिकोण अपनाने और विभिन्न विभागों के बीच बेहतर समन्वय की आवश्यकता पर बल दिया। उन्होंने यह बात अंतर्राष्ट्रीय वन दिवस पर आयोजित राष्ट्रीय कार्यशाला में कही।
भारतीय वानिकी अनुसंधान एवं शिक्षा परिषद के तहत वन अनुसंधान संस्थान में “वन-आधारित सतत जैव-अर्थव्यवस्था को बढ़ावा देनाः मुद्दे और चुनौतियां” विषय पर आयोजित कार्यशाला का केदं्रीय मंत्री भूपेंद्र यादव ने शुभारंभ किया। उन्होंने ग्रीन क्रेडिट प्रोग्राम और कार्बन क्रेडिट के महत्व को रेखांकित किया, कहा कि वन संसाधनों के संरक्षण में सांस्कृतिक मूल्यों की भी महत्वपूर्ण भूमिका है।
उन्होंने कहा कि प्रकृति सर्वोपरि है और मानव अस्तित्व उसके साथ सह-अस्तित्व पर निर्भर करता है। वन न केवल अर्थव्यवस्था के लिए, बल्कि सामाजिक शांति और संतुलन के लिए भी आवश्यक हैं।
कार्यशाला में वन-आधारित जैव-उत्पादों के व्यावसायीकरण, सतत वन प्रबंधन, नीतिगत ढांचे, उद्यमिता और नवाचार जैसे विषयों पर चर्चा की गई। तकनीकी सत्रों में कृषि-वानिकी, गैर-काष्ठ वन उत्पाद, कार्बन बाजार, वन्यजीव संरक्षण, इको-टूरिज्म और डिजिटल निगरानी जैसे मुद्दों पर विशेष फोकस रहा।
इस पहल का उद्देश्य वन संसाधनों के सतत उपयोग को बढ़ावा देना, स्थानीय आजीविका को सशक्त करना और प्राकृतिक वनों पर दबाव कम करना है।



