दून विवि में नाटकों के यादगार मंचन को मिली सराहना

देहरादून। विश्व रंगमंच दिवस को लेकर दून विश्वविद्यालय और दूनघाटी रंगमंच की ओर से आयोजित पांच दिवसीय नाट्य समारोह संपन्न हो गया। नाट्य शृंखला में कई नाट्य संस्थाओं और कलाकारों ने यादगार नाटकों का मंचन कर दर्शकों से भरपूर सराहना बटोरी।
समारोह का शुभारंभ गिरीश कर्नाड के प्रसिद्ध नाटक ‘तुगलक’ के मंचन से हुआ, जिसका निर्देशन बृजेश नारायण ने किया। सशक्त अभिनय और प्रभावी संवादों ने दर्शकों को बांधे रखा। दूसरे दिन बादल सरकार के ‘पगला घोड़ा’ का मंचन मिताली पुनेठा के निर्देशन में हुआ, जिसमें मानव मन की जटिल भावनाओं को मार्मिक ढंग से प्रस्तुत किया गया।
तीसरे दिन बादल सरकार के ही ‘बाकी इतिहास’ नाटक् ने अपराधबोध और अस्तित्व जैसे प्रश्नों को उभारा, जबकि चौथे दिन छात्रों द्वारा हरिशंकर परसाई के ‘राजपुर रोड का रोमियो’ ने सामाजिक ढोंग पर तीखा व्यंग्य किया। अंतिम दिन ‘सावित्रीबाई फुले’ नाटक ने उनके संघर्ष और शिक्षा के प्रति समर्पण को प्रभावशाली रूप में प्रस्तुत किया।
समापन पर कुलपति प्रो. सुरेखा डंगवाल ने इस आयोजन को सांस्कृतिक चेतना और सृजनात्मक अभिव्यक्ति के लिए महत्वपूर्ण बताया। समारोह में डॉ. अजीत पंवार, डॉ. कैलाश कंडवाल, दुर्गेश डिमरी, प्रो. एच.सी. पुरोहित, प्रो. हर्ष डोभाल, प्रो. आर. पी. ममगाईं, डॉ कैलाश कंडवाल, श्रीश डोभाल, डॉ चेतना पोखरियाल आदि मौजूद रहे।



