
भारत में गर्मियों का मौसम आमतौर पर तेज़ गर्मी, लू और थकान के रूप में देखा जाता है, लेकिन विशेषज्ञों के अनुसार यह मौसम शरीर और मानसिक स्वास्थ्य के लिए कई मायनों में लाभकारी भी साबित हो सकता है। सही दिनचर्या और जागरूकता के साथ गर्मियों को स्वास्थ्य संवर्धन के अवसर में बदला जा सकता है।
विशेषज्ञ बताते हैं कि इस मौसम में सूर्य का प्रकाश प्रचुर मात्रा में उपलब्ध होता है, जो विटामिन डी के निर्माण के लिए अत्यंत आवश्यक है। त्वचा के सूर्य की यूवी-बी किरणों के संपर्क में आने पर शरीर में विटामिन डी का संश्लेषण होता है, जो हड्डियों की मजबूती, कैल्शियम संतुलन और प्रतिरक्षा प्रणाली को बेहतर बनाने में अहम भूमिका निभाता है। इसके साथ ही यह मानसिक स्वास्थ्य पर भी सकारात्मक प्रभाव डालते हुए अवसाद के जोखिम को कम करता है।
गर्मियों में पसीना आना एक सामान्य प्रक्रिया है, जिसे शरीर की थर्मोरेगुलेशन प्रणाली का हिस्सा माना जाता है। यह प्रक्रिया शरीर के तापमान को नियंत्रित करने के साथ-साथ कुछ अपशिष्ट पदार्थों को बाहर निकालने में भी सहायक होती है। इससे त्वचा की गुणवत्ता में सुधार होता है और शरीर अधिक सक्रिय महसूस करता है।
इस मौसम में हल्का और जलयुक्त भोजन करना शरीर के लिए अधिक फायदेमंद होता है। तरबूज, खरबूजा, खीरा और ककड़ी जैसे मौसमी फल शरीर में पानी की कमी को पूरा करने के साथ इलेक्ट्रोलाइट संतुलन बनाए रखने में मदद करते हैं। इससे पाचन क्रिया बेहतर होती है और मेटाबोलिज़्म भी सुचारु रहता है।
मानसिक स्वास्थ्य के दृष्टिकोण से भी गर्मियों का मौसम लाभकारी माना जाता है। लंबे दिन और अधिक प्रकाश के कारण शरीर में सेरोटोनिन का स्तर बढ़ता है, जिससे मूड बेहतर होता है और तनाव कम होता है। वहीं, योग, व्यायाम और खेलकूद जैसी बाहरी गतिविधियां एंडोर्फिन के स्राव को बढ़ाकर व्यक्ति को ऊर्जा और संतोष का अनुभव कराती हैं।
हालांकि, विशेषज्ञ यह भी चेतावनी देते हैं कि गर्मियों में लापरवाही स्वास्थ्य के लिए हानिकारक हो सकती है। अत्यधिक तापमान से बचाव, पर्याप्त पानी का सेवन, हल्के व ढीले कपड़े पहनना और दोपहर के समय धूप से बचना आवश्यक है। विशेष रूप से हीट स्ट्रेस और डिहाइड्रेशन से बचने के लिए नियमित अंतराल पर तरल पदार्थ लेना जरूरी है।
कुल मिलाकर, गर्मियों को केवल असुविधा के रूप में देखना सही नहीं है। वैज्ञानिक दृष्टिकोण से यह मौसम शरीर और मन को सशक्त बनाने का अवसर प्रदान करता है, बशर्ते इसे संतुलित और सजग जीवनशैली के साथ अपनाया जाए।

– डॉ. सिद्धार्थ कुडियाल
एमपीटी (न्यूरोलॉजी), पीएच.डी. (शोधार्थी), सहायक प्रोफेसर, यूनिवर्सिटी इंस्टिट्यूट ऑफ एलाइड हेल्थ साइंसेज, चंडीगढ़ यूनिवर्सिटी, मोहाली, पंजाब, भारत



