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गैरसैणः सत्र, सियासत और पहाड़ की उम्मीदें

• रजपाल बिष्ट

गोपेश्वर। अब जबकि 9 से 13 मार्च तक उत्तराखंड की ग्रीष्मकालीन राजधानी गैरसैण के भराड़ीसैण विधानसभा भवन में बजट सत्र आयोजित होने जा रहा है तो सत्र को लेकर लोगों की उम्मीदें भी परवान चढ़ने लगी हैं। माना जा रहा है कि उत्तराखंड विधानसभा के अगले साल होने जा रहे चुनाव को लेकर गैरसैण को लेकर धामी सरकार सधे कदमों के साथ आगे बढ़ेगी। भराड़ीसैण विधानसभा भवन में होने जा रहे विधानसभा के बजट सत्र को लेकर लोगों की टकटकी निगाहें अभी से टिकने लगी है।

उत्तराखंड कैबिनेट ने 2026-27 के बजट को 1.12 लाख करोड़ से अधिक का बजट पेश करने को हरी झंडी दे दी है। बजट का आकार पिछले साल के बजट से लगभग 10 फीसद अधिक होगा। इस दौरान कई विधेयक भी पारित किए जाएंगे। वैसे राज्य सरकार ने पिछले साल अगस्त माह में भी मानसून सत्र का आयोजन किया था। इसके बावजूद सरकार इस साल भी बजट सत्र के आयोजन से पीछे नहीं हटी। इस तरह कहा जा सकता है कि सीएम पुष्कर सिंह धामी की सरकार गैरसैण मिशन पर लगातार कदम बढ़ाती जा रही है। मौजूदा बजट सत्र को इसी रूप में देखा जा रहा है।

गैरसैण मिशन पर धामी सरकार
पिछले साल गैरसैण में बजट सत्र का आयोजन नहीं हो पाया था तो सरकार ने अगस्त माह में ग्रीष्मकालीन सत्र भराडीसैण में आयोजित किया था। मौसम के बिगडे मिजाज के बावजूद धामी सरकार ने मानसून सत्र गैरसैण में संचालित करने का फैसला लेकर पर्वतीय जनमानस का हितैषी होने का भरोसा दिया था। इसी दौर में धराली, थराली तथा नंदानगर के दैवीय आपदा ने आम लोगों को झकझोर कर रख दिया था। इसकी परवाह किए बिना सरकार गैरसैण मिशन पर बढ़ती रही।

वर्ष 2014 में गैरसैण में तंबुओं से विधानसभा सत्र की शुरूआत हुई थी। यह सिलसिला अब तक जारी है। हालांकि हरीश रावत सरकार ने जाते-जाते गैरसैण में साल में एक सत्र आयोजित करने का फैसला लिया था। इसके चलते गैरसैण में विधानसभा का कोई न कोई सत्र आयोजित होता चला आ रहा है।

इसके इतर मुख्यमंत्री के रूप में पुष्कर सिंह धामी ने पहली बार 4 जुलाई 2021 को राज्य भी कमान संभाली तो विधानसभा सत्रों के अलावा वे स्वाधीनता दिवस, राज्य स्थापना दिवस तथा गणतंत्र दिवस पर भराडीसैण स्थित विधानसभा परिसर में अपनी आमद देते आ रहे है। वह 23 मार्च 2022 तक सीएम के रूप में पहली पारी खेल चुके हैं और इसके बाद वह दूसरी पारी अब तक खेलते आ रहे हैं।

वर्ष 2021 में राज्य के मुख्यमंत्री की कमान संभालते ही धामी ने 15 अगस्त 2021 को भराड़ीसैण विधानसभा परिसर में आयोजित स्वाधीनता दिवस में प्रतिभाग कर गैरसैण के प्रति अपनी सरकार का प्रेम जाहिर किया। इसके बाद 9 नवम्बर 21 को राज्य स्थापना दिवस पर धामी भराड़ीसैण पहुंचे। वर्ष 2022 के 23 मार्च को सीएम के रूप में अपनी दूसरी पारी की शुरूआत की तो विधानसभा का बजट सत्र देहरादून में आयोजित हुआ।

इसके बाद नवंबर 2022 को राज्य स्थापना दिवस भराड़ीसैण में मनाने के लिए सीएम पहुंचे। 2022 में शीतकालीन सत्र दिसम्बर में आयोजित करने का फैसला तो हुआ किंतु भारी ठंड और जरुरी सुविधाओं के अभाव में यह सत्र टाल दिया गया। 2023 में गणतंत्र दिवस कार्यक्रम में शामिल होने सीएम धामी भराड़ीसैण आए।

फिर गैरसैण में 13 से 18 मार्च 2024 तक बजट सत्र का आयोजन हुआ और पूरी सरकार भराडीसैण में जमी रही। यह सिलसिला आगे बढ़ाते हुए 15 अगस्त तथा 9 नम्बवर को स्थापना दिवस भराड़ीसैण में मनाने सीएम पहुंचे। 2024 में लोकसभा चुनाव के चलते बजट सत्र को देहरादून में ही आयोजित किया गया। फिर 19 से 22 अगस्त 2024 तक पहली बार मानसून सत्र गैरसैण में आयोजित हुआ।

इसके चलते धामी सरकार समेत माननीय भराड़ीसैण की फिजाओं में ही डेरा जमाए रहे। राज्य स्थापना दिवस मनाने सीएम 9 नवम्बर को गैरसैण आए। पिछले साल 2025 में विधानसभा का बजट सत्र देहरादून में आयोजित हुआ तो मानसून सत्र 19 से 20 अगस्त तक भराडीसैण में संचालित हुआ।

गुजरे साल में उत्तरकाशी के धराली तथा चमोली के थराली और नंदानगर में आई भीषण आपदा के बाद माना जा रहा था कि सरकार मौसम के बिगडे मिजाज के बीच देहरादून में ही मानसून सत्र आयोजित करेगी किंतु सरकार ने विपरीत परिस्थितियों के बीच अगस्त माह में मानसून सत्र का आयोजन किया। ऐसा इसलिए भी कि पर्वतीय जनमानस आपदा और मौसम के बिगडे मिजाज के बीच पहाड़ों में ही कठिन परिस्थितियों में रहने को विवश है तो सरकार ने भी इसी के चलते गैरसैण की पहाड़ियों में सत्र संचालित करने का अडिग फैसला लिया। उम्मीद की जा रही है कि 9 से 13 मार्च तक आयोजित होने वाले सत्र में मुख्यमंत्री धामी गैरसैण के विकास के लिए पिटारा खोलेंगे।

2012 में लिखी गई गैरसैंण की पटकथा
3 नवम्बर 2012 को उत्तराखंड केबिनेट की बैठक के जरिए गैरसैण की पटकथा लिखी गई। राज्य गठन के बाद पहली बार गैरसैंण में कैबिनेट बैठक के आयोजन से पहाडी क्षेत्रों के विकास के लिए एक नए युग का सूत्रपात हुआ। उत्तराखंड राज्य के गवन के बाद पहली बार पहाड़ों के मध्य गैरसैण में बैठक का आयोजन किया गया। 3 नवम्बर 2012 के दिन गैरसैण में पहाड़ों के लिहाज से एक नई इबारत भी लिखी गई।

दरअसल गैरसैण के राजशाही के दौर से यहां का महत्व खास रहा। गोरखाओं के आक्रमण के दौर में लोहबागढ़ में अपना रूतबा भी दिखाया था। यही वजह है कि यहां के लोगों को मार्शल रेस का तोहफा भी हासिल हुआ था। 1888 में चांदपुर गढ़ के राजा भानु प्रताप से धारमालवा से आए कनकपाल को राज्य प्राप्त हआ था। वर्ष 1500 में कनकपाल के वंशज अजयपाल ने कई गढ़ों पर विजय पाकर अपना एकछत्र राज्य कायम किया था। इसके बाद चांदपर गढ़ी से ही तब राजा ने 1512 में देवलगढ़ में अपनी राजधानी बना दी थी। इसके बाद 1517 में श्रीनगर में राजधानी बनाई गई।

यहां भी उल्लेखनीय है कि ब्रिटिश कमिश्नर लुशिंग्टन ने तो गढ़वाल जिले का मुख्यालय पौड़ी के बजाय गैरसैण के लोहबा में स्थापित किए जाने का प्रस्ताव तैयार किया था किंतु इसे स्वीकृति नहीं मिल पाई। उत्तराखंड राज्य निर्माण के दौर में स्थाई राजधानी गैरसैण बनाए जाने पर स्वीकार्यता बन गई थी।

इसके बाद गैरसैण को लेकर तमाम आंदोलन भी हुए। अंततः 3 नवम्बर 2012 को तत्कालीन मुख्यमंत्री विजय बहुगुणा ने केबिनेट बैठक का आयोजन कर विधानसभा भवन के निर्माण की घोषणा के साथ गैरसैण की उम्मीदों को पंख लगा दिए। यहीं से गैरसैण ने एक नई इबारत लिखनी शुरू कर दी।

2020 में तत्कालीन मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र रावत ने गैरसैण ग्रीष्मकालीन राजधानी की घोषणा कर एक कदम और आगे बढ़ने का बीड़ा उठाया। राज्य सरकार द्वारा विशालकाय विधानसभा भवन बनाने के चलते गैरसैण आम पहाड़ी जनमानस की भावनाओं का प्रतीक बन गया है। धामी सरकार भी गैरसैण के सरोकारों से कदम से कदम बढ़ाकर चल रही है। गैरसैण में विधानसभा के सत्र आयोजनों को इसी रूप में देखा जा रहा है।

दरअसल कई राज्यों में विधानसभाओं के सत्र दूसरे स्थानों पर किए जाने के उदाहरण भी विद्यमान हैं। पडोसी राज्य हिमाचल का विधानसभा सत्र भी धर्मशाला में आयोजित होता आ रहा है। इसी तरह जम्मू कश्मीर में भी दो राजधानियां थी तो तब दोनों से सत्र संचालित होते रहे हैं।

माननीयों को रास नहीं आ रहा भराड़ीसैण
लैंसडाउन के विधायक दिलीप रावत को तो भराड़ीसैण की आबोहवा रास नहीं आ रही है। उन्होंने यहां तक कह डाला कि भराड़ीसैण में उन्हें ठंड लगती है। यहां तक कि सांस फूलने के कारण सत्र के दौरान परेशानी खड़ी होती है। इसी तरह देहरादून के विधायक विनोद चमोली भी कुछ इसी तरह की भाषा बोल रहे हैं। वह तो एक पत्रकार पर इस तरह भिड़ गए कि वह अपने पिताजी को इस ठंड में भेज दें। एक दौर में पहाड़ों को लोग स्वास्थ्य तथा पर्यावरण के लिए अनुकूल मानते रहे हैं किंतु इस पहाड़ी राज्य के विधायक और पहाडों के वाशिदों को ही अब पहाड़ों का पर्यावरण रास नहीं आ रहा है।

महाराज ने की मिनी सचिवालय की वकालत
उत्तराखंड के केबिनेट मंत्री सतपाल महाराज ने तो अपनी निजी राय व्यक्त करते हुए कहा कि उनकी राय भराड़ीसैण (गैरसैण) में मिनी सचिवालय बनाया जाना चाहिए। इससे सरकार की प्रशासनिक क्षमता में वृद्धि होगी। अवस्थापना सुविधाओं का तेजी से विकास होगा और लोगों को रोजगार के अवसर मिलेंगे।

न जाने कहां गुम हो गया स्पेशल पैकेज
गैरसैण की ग्रीष्मकालीन राजधानी परिक्षेत्र के विकास व राजधानी के अनुरूप संसाधन उपलब्ध कराने के लिए त्रिवेंद्र रावत सरकार के 25 हजार करोड़ के स्पेशल पैकेज का जीन फिर बाहर आ गया है। कर्णप्रयाग के पूर्व विधायक सुरेंद्र सिंह नेगी का कहना है कि 4 मार्च 2020 को तत्कालीन सीएम त्रिवेंद्र रावत ने इस पैकेज की घोषणा की थी। 9 नवम्बर 2020 को राज्य स्थापना दिवस पर गैरसैण में ही उन्होंने 10 वर्षों के लिए 25 हजार करोड़ के स्पेशल पैकेज का ऐलान किया था। इससे समर कैपिटल की अवधारणा को बल मिलने लगा था। यह सीएम की घोषणा संख्या 424/2020 में भी दर्ज है। पूर्व विधायक सुरेंद्र सिंह नेगी का कहना है कि 2020 में ही सीएम ने गैरसैण परिक्षेत्र के विकास के लिए मुख्य सचिव की अध्यक्षता में एक कमेटी का गठन किया गया था। सीएम के तत्कालीन विशेष सचिव पराग मधुकर को सदस्य सचिव बनाया गया। सीएम की घोषणा संख्या 426/2020 में इस कमेठी का गठन शामिल है।

मिनी सचिवालय की घोषणा भी अधर में
भराडीसैण में सीएम की घोषणा संख्या 328/2020 में यह दर्ज है। शिलान्यास के बावजूद काम होना बाकी है। गैरसैण में झील निर्माण की घोषणा के लिए 9238 वित्तीय स्वीकृत का प्रस्ताव भी लंबित है। इसी तरह भाषा संस्थान खोलने के लिए 50 लाख रुपये सलेंडर कर दिए गए। अर्तराष्ट्रीय संसदीय शोध संस्थान की स्थापना का प्रस्ताव भी विधानसभा द्वारा सर्वानुमति से पारित किया गया। इसके लिए पूर्व में ही 1 करोड़ रुपये संस्थान के नाम जमा कर दिए गए। भाषा संस्थान के लिए 50 लाख की धनराशि प्रदान की गई। भूमि भी उपलब्ध करा दी गई किंतु मामला लंबित है।

गैरसैंणः कब क्या हुआ
• 9 मई 2012- तत्कालीन मुख्यमंत्री विजय बहुगुणा ने गोपेश्वर तथा गैरसैंण की जनसभाओं में तत्कालीन सांसद सतपाल महाराज के आग्रह पर गैरसैंण में दो अक्टूबर को कैबिनेट बैठक के आयोजन की घोषणा की। चुनाव आचार संहिता के चलते इस बैठक को 3 नवंबर 2012 को आयोजित करने का निर्णय लिया।
• 3 नवंबर 2012-देहरादून से गैरसैंण आते वक्त तत्कालीन सीएम विजय बहुगुणा, स्पीकर गोविंद सिंह कुंजवाल व सांसद सतपाल महाराज ने गैरसैंण में विधानसभा भवन बनाने पर हेलीकाप्टर में ही सहमति बनाई।
• 3 नवंबर 2012-गैरसैंण में कैबिनेट बैठक में विधानसभा भवन गैरसैंण में भी बनाने का निर्णय। शिलान्यास 14 जनवरी 2013 को किए जाने की तिथि की घोषणा।
• 14 जनवरी 2013 – गैरसैंण में तत्कालीन मुख्यमंत्री विजय बहुगुणा द्वारा विधानसभा भवन का शिलान्यास ।
• 9 नवंबर 2013-तत्कालीन विधानसभा अध्यक्ष गोविंद सिंह कुंजवाल तथा उपाध्यक्ष डा. अनुसूया प्रसाद मैखुरी द्वारा भराड़ीसैंण में विधानसभा भवन निर्माण के लिए भूमि पूजन।
• 12 जून 2014-तत्कालीन मुख्यमंत्री हरीश रावत ने भराड़ीसैंण में मिनी सचिवालय बनाए जाने की घोषणा की। गैरसैंण में अवस्थापना सुविधाओं के विकास के लिए गैरसैंण विकास परिषद के गठन का किया ऐलान।
• 9-11 जून 2014-गैरसैंण में तंबुओं में विधान सभा सत्र का संचालन।
• 2-3 नवंबर 2015-गैरसैंण के पॉलीटेक्निक में चला विधानसभा सत्र।
• 17-18 नवंबर 2016-भराड़ीसैंण विधानसभा भवन में चला विधानसभा सत्र।
• 7-8 दिसंबर 2017- भराड़ीसैंण में चला विधान सभा का शीतकालीन सत्र।
• 20-26 मार्च 2018-भराड़ीसैंण में चला विधान सभा का पहला बजट सत्र।
• 3 मार्च 2020-भराड़ीसैंण में बजट सत्र का आगाज।
• 4 मार्च 2020-सीएम त्रिवेंद्र रावत ने की गैरसैंण ग्रीष्मकालीन राजधानी की घोषणा।
• 9 नवंबर 2020-सीएम त्रिवेंद्र रावत ने गैरसैंण ग्रीष्मकालीन राजधानी के लिए 25 हजार करोड़ के पैकेज की घोषणा की।
• 1 मार्च से 8 मार्च 2021 तक गैरसैंण में चला विधान सभा का बजट सत्र।
• 4 मार्च 2021 को गैरसैण कमिश्नरी की तत्कालीन मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र रावत ने की घोषणा।
• 2023-13 से 18 मार्च तक बजट सत्र का आयोजन।
• 2024-9 से 22 अगस्त तक भराड़ीसैण में पहली बार मानसून सत्र।
• 2025-19 से 20 अगस्त तक मानसून सत्र।
• 2026-9 से 13 मार्च तक भराड़ीसैण में विधानसभा सत्र प्रस्तावित।

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