देहरादूनः बच्चों में पढ़ने की आदत बढ़ाने पर जोर
दून बुक फेस्टिवल में बाल साहित्य पर धाद द्वारा विमर्श सत्र आयोजित

देहरादून। दून बुक फेस्टिवल 2026 में धाद साहित्य एकांश की ओर से फूलदेई बाल पर्व के उपलक्ष में बाल साहित्य पर एक विमर्श सत्र आयोजित किया गया। कार्यक्रम का उद्देश्य बच्चों में पढ़ने-लिखने की रुचि विकसित करना और नई पीढ़ी को साहित्य से जोड़ना रहा।
सत्र में मुख्य वक्ता वरिष्ठ साहित्यकार डॉ. दिनेश चमोला ‘शैलेश’ ने कहा कि बाल साहित्य बच्चों के चरित्र-निर्माण की व्यावहारिक प्रयोगशाला है। माता-पिता, गुरु व साहित्यकार की भूमिका एक कुम्हार या दक्ष माली की तरह होती है। जिनकी बच्चे की प्रतिभा के विकास में होती है। बाल साहित्य भी इस भूमिका को निभाता है।
बाल साहित्यकार अशोक मिश्रा ने कहा कि समाज और देश के बेहतर भविष्य के लिए अपने बच्चों के बौद्धिक व भावनात्मक विकास पर ज्यादा ध्यान देना होगा। यह काम बाल साहित्य के माध्यम से सरलता से किया जा सकता है।
कार्यक्रम संयोजक कल्पना बहुगुणा ने कहा कि नई पीढ़ी में पठन-पाठन की घटती रुचि चिंता का विषय है। डॉ. विद्या सिंह ने बच्चों में पुस्तकें पढ़ने की आदत विकसित करने को चुनौतीपूर्ण बताया। समापन पर कोना कक्षा के संयोजक गणेश उनियाल ने कहा कि हम हर वर्ष फूलदेई को 14 मार्च से 14 अप्रैल तक कोना कक्षा के वार्षिक आयोजन के रूप में मनाते हैं। जिसमें बच्चों के लिए अलग अलग रचनात्मक प्रतिभाग आयोजित किये जाते हैं।
संचालन डॉ अवनीश उनियाल ने किया। मौके पर जितेन ठाकुर, तन्मय ममगाईं, आशा डोभाल, शांति प्रकाश जिज्ञासु, शुभम शर्मा, बबिता जोशी, राकेश जुगरान, चंद्रभागा शुक्ला, सुरेश कुकरेती, बीरेंद्र खंडूरी, दिनेश बौडाई, सुधीर नौटियाल, नेहा पाठक, एके तिवारी नितिका वोहरा, यश सिंह, रेखा काला, पूर्णिमा गैरोला, ज्योत्सना मिश्रा, दिव्या मिश्रा, बीना रावत, कमलेश पांडेय, मदन सिंह रावत, अनूप गुप्ता, पंकज गुप्ता, निरंजन, बबिता, प्रदीप डोभाल, रवि उपाध्याय, दीपक चौहान, आरती रावत, अरविन्द सिंह, नरेश जैन, वीरेंदर शर्मा आदि मौजूद रहे।



