Dehradun: मूल निवास और सख्त भू-कानून पर गांधी पार्क में जुटे लोग

देहरादून। मूल निवास भू-कानून संघर्ष समिति के बैनर तले शनिवार को गांधी पार्क में आयोजित धरने में प्रदेशभर से आए संगठनों व लोगों ने मूल निवास और कड़े भू-कानून की मांग को मजबूती से उठाया।
कार्यक्रम की शुरुआत राज्य आंदोलन के अग्रणी नेता दिवंगत दिवाकर भट्ट की प्रतिमा पर पुष्पांजलि और मौन श्रद्धांजलि के साथ हुई। समिति के संयोजक लूशुन टोडरिया ने कहा कि उत्तराखंड में फर्जी स्थायी निवास प्रमाण पत्रों के बढ़ते मामलों से स्थानीय युवाओं के अधिकार प्रभावित हो रहे हैं, इसलिए सरकार को मूल निवास पर अपनी स्पष्ट नीति घोषित करनी चाहिए।
उन्होंने कहा कि सभी नगर निकायों को भू-कानून के दायरे में लाते हुए पर्वतीय क्षेत्रों में पांचवीं अनुसूची के प्रावधान और मूल निवास 1950 लागू करने की दिशा में ठोस कदम उठाने होंगे। अन्य वक्ताओं ने कृषि भूमि को व्यावसायिक भूमि में बदले जाने की बढ़ती प्रक्रिया पर भी गंभीर चिंता जताई।
आरटीआई कार्यकर्ता अनूप नौटियाल ने कहा कि शहरों की उपजाऊ भूमि का लगातार खत्म होना भविष्य के लिए खतरे का संकेत है। समिति प्रवक्ता हिमांशु रावत ने कहा कि मूल निवास अब मांगने का नहीं, बल्कि उसे वापस लेने का समय है। महिला मंच की प्रतिनिधि निर्मला बिष्ट ने आरोप लगाया कि सरकार ने कई नगर निकायों को भू-कानून से बाहर रखकर मजबूत भूमि कानून बनाने की मंशा ही कमजोर कर दी है।
विभिन्न संगठनों के प्रतिनिधियों ने कहा कि यह केवल कानून की लड़ाई नहीं, बल्कि उत्तराखंड की अस्मिता और भविष्य का प्रश्न है। वक्ताओं ने चेतावनी दी कि यदि सरकार ने जल्द समाधान नहीं निकाला तो आंदोलन को और व्यापक किया जाएगा।
धरने में हिमालय क्रांति पार्टी, उत्तराखंड राज्य आंदोलनकारी मंच, स्वाभिमान मोर्चा, बेरोजगार संघ, समानता पार्टी सहित अनेक सामाजिक संगठनों के प्रतिनिधि मौजूद रहे।



