Dehradun: प्रतिबंधित भूमि की रजिस्ट्री मामले में FIR दर्ज
डीएम ने लिया संज्ञान, रजिस्ट्रार कार्यालय की भूमिका भी जांच के घेरे में

देहरादून। प्रतिबंधित श्रेणी की जमीन के कथित अवैध क्रय-विक्रय और कूटरचित दस्तावेजों के जरिए रजिस्ट्री कराने के मामले में डीएम सविन बंसल ने सख्त रुख अपनाया है। डीएम ने खरीदार और विक्रेता के खिलाफ थाना शहर कोतवाली में एफआईआर दर्ज कराने के निर्देश दिए हैं।
प्रशासन के संज्ञान में आया कि मौजा आमवाला तरला स्थित खसरा संख्या 94ख, 134, 135 और 136 की भूमि, जिस पर न्यायालय द्वारा क्रय-विक्रय पर रोक लगाई गई है, उसकी कूटरचित अभिलेख तैयार कर पंजीकरण कराया गया। शिकायतकर्ता ने मामले में आपत्ति दर्ज कराते हुए बताया कि संबंधित भूमि पीएसीएल (पर्ल्स एग्रो टेक कॉर्पोरेशन लिमिटेड) से जुड़ी प्रतिबंधित श्रेणी में आती है।
प्राथमिक जांच में सामने आया कि भूमि का वास्तविक विवरण छिपाकर रजिस्ट्री कराई गई, और विवादित होने के बावजूद लेन-देन किया गया जो न्यायालय आदेशों की अवहेलना है। भूमि का संबंध कथित रूप से गोल्डन फॉरेस्ट से जुड़ी परिसंपत्तियों से भी बताया जा रहा है, जिन पर विभिन्न स्तरों पर पूर्व से प्रतिबंध लागू हैं।
डीएम के निर्देश पर रजिस्ट्रार देहरादून और एसडीएम सदर को विलेखों की पुनः जांच के आदेश दिए गए हैं। यदि इनके आधार पर दाखिल-खारिज आदेश जारी हुए हैं, तो उन्हें तत्काल निरस्त किया जाएगा। पंजीकरण अधिनियम 1908 की धारा 83 के तहत मुकदमा दर्ज कर लिया गया है।
डीएम ने स्पष्ट किया कि न्यायालय आदेशों की अवहेलना और फर्जी दस्तावेजों के आधार पर भूमि लेन-देन किसी भी स्थिति में बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। दोषियों के खिलाफ कठोर कानूनी कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी।



