
देहरादून। केंद्रीय बजट पर उत्तराखंड के पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत ने तीखी प्रतिक्रिया दी है। सोशल मीडिया पोस्ट के माध्यम से उन्होंने बजट को 2047 के विकसित भारत का खाका खींचते हुए ग्रामीण भारत, कृषि और लघु उद्योगों को भूल जाने वाला बजट बताया है।
हरीश रावत ने कहा कि बजट में रक्षा और ट्रांसपोर्ट जैसे क्षेत्रों को प्राथमिकता दी गई है, जबकि कृषि, ग्रामीण रोजगार और छोटे उद्योगों के लिए आवंटन अपेक्षाकृत बहुत कम है। इसका सीधा असर ग्रामीण रोजगार और छोटे उद्योगों की मजबूती पर पड़ेगा, जिससे बेरोजगारी बढ़ने की आशंका है। उन्होंने कहा कि नई तकनीकी संभावनाएं पैदा होंगी, लेकिन वे सामान्य और मध्यम स्तर के रोजगारों को कम कर सकती हैं।
पर्यटन के संदर्भ में रावत ने कहा कि हिमालयी राज्यों के लिए ट्रैकिंग हब जैसी घोषणाएं जरूर की गई हैं, लेकिन ईको-टूरिज्म और उसके लिए आवश्यक पूंजीगत निवेश पर बजट चुप है। उन्होंने उम्मीद जताई थी कि उत्तराखंड जैसे राज्यों को ग्रीन बोनस मिलेगा और मध्य हिमालयी क्षेत्रों के किसानों को कार्बन क्रेडिट योजनाओं से जोड़ा जाएगा, लेकिन बजट में इसका कोई उल्लेख नहीं है।
पूर्व मुख्यमंत्री ने शिक्षा और स्वास्थ्य को लेकर भी चिंता जताई। उनका कहना है कि महंगी होती शिक्षा और स्वास्थ्य सेवाओं का बोझ निम्न मध्यम वर्ग और मध्यम वर्ग के लिए लगातार बढ़ रहा है, लेकिन बजट में इन वर्गों को कोई ठोस राहत नहीं दी गई। असंगठित क्षेत्र और गिग वर्कर्स के लिए भी किसी नई योजना की घोषणा न होने पर उन्होंने निराशा जताई।
आपदा प्रबंधन और जलवायु परिवर्तन के मुद्दे पर रावत ने कहा कि मध्य हिमालयी राज्य सबसे अधिक प्रभावित हो रहे हैं, लेकिन उन्हें सशक्त बनाने के लिए बजट में कोई विशेष आर्थिक सहायता या योजना नहीं दिखती। कुल मिलाकर उन्होंने इस बजट को उत्तराखंड, हिमालयी राज्यों और देश के सामान्य नागरिकों के लिए निराशाजनक बताया।



