
ऋषिकेश। 50 वर्ष की आयु पार करने के बाद शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता कमजोर होने लगती है, जिससे संक्रमण और गंभीर बीमारियों का खतरा बढ़ जाता है। ऐसे में विशेषज्ञों ने समय रहते जरूरी टीकाकरण की सलाह दी है। एम्स ऋषिकेश में वयस्क टीकाकरण (एडल्ट वैक्सीनेशन) की सुविधा उपलब्ध है।
एम्स के सामुदायिक चिकित्सा विभाग की प्रमुख प्रो. वर्तिका सक्सेना के अनुसार, इस आयु वर्ग में निमोनिया, खांसी-जुकाम और अन्य संक्रमणों का खतरा अधिक रहता है। स्वास्थ्य बिगड़ने पर हर 10 में से लगभग 3 लोगों को अस्पताल में भर्ती तक होना पड़ सकता है। इसलिए इन्फ्लूएंजा, हेपेटाइटिस, टेटनस, निमोनिया और वैरीसेला जैसे टीके बेहद जरूरी हैं।
विशेषज्ञों का कहना है कि बचपन में लगाए गए टीकों का प्रभाव सीमित समय तक ही रहता है, जिसके बाद पुनः टीकाकरण आवश्यक हो जाता है। खासतौर पर डायबिटीज के मरीज, विदेश यात्रा करने वाले, हज यात्री और बड़े आयोजनों में शामिल होने वाले लोगों के लिए ये टीके अनिवार्य माने गए हैं।
टीकाकरण केंद्र की नोडल अधिकारी डॉ. स्मिता सिन्हा ने बताया कि बीते तीन महीनों में 600 से अधिक लोगों को ये टीके लगाए जा चुके हैं, जिससे लोगों में जागरूकता बढ़ रही है।
विशेषज्ञों ने न्यूमोकोकल और इन्फ्लूएंजा वैक्सीन को सबसे महत्वपूर्ण बताया है, जो सांस संबंधी गंभीर बीमारियों से बचाव करती हैं। वहीं, जिन लोगों को बचपन में चिकन पॉक्स नहीं हुआ, उन्हें वैरीसेला वैक्सीन जरूर लगवानी चाहिए।
एम्स की कार्यकारी निदेशक प्रो. मीनू सिंह ने कहा कि वयस्क टीकाकरण न केवल संक्रमण से बचाव करता है, बल्कि बीमारियों की गंभीरता को भी कम करता है। यह बढ़ती उम्र में बेहतर स्वास्थ्य बनाए रखने में सहायक होता है।



